गांधीनगर , दिसंबर 08 -- केंद्र सरकार ने हाल ही में मत्स्य विभाग (डीओएफ), मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएचडी) और संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के साथ एक ऐतिहासिक तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (टीसीपी) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत गुजरात में कच्छ जिले के जखाऊ में भी विश्वस्तरीय ब्लू हार्बर मॉडल बनेगा।
सूत्रों ने सोमवार को बताया कि इस साझेदारी के तहत जखाऊ (गुजरात), वनकबारा (दमन-दीव) और कराईकल (पुडुचेरी) में विश्व-स्तरीय "ब्लू हार्बर" स्थापित किए जाएंगे जो देश में स्मार्ट, टिकाऊ और समावेशी मत्स्य अवसंरचना के नए राष्ट्रीय मानक गढ़ेंगे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएसवाय) के तहत 452.32 करोड़ रुपये के निवेश से स्मार्ट और एकीकृत फिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाएँ तटीय विकास को तेज़ी से बदल रही हैं। इन परियोजनाओं से न सिर्फ समुद्री मत्स्य व्यवसाय आधुनिक होगा बल्कि भारत के वैश्विक समुद्री-आहार बाजार में भी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बढ़ेगा।
कच्छ जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित जखाऊ हार्बर गुजरात के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मत्स्य केंद्रों में से एक है और यह राज्य की ब्लू ग्रोथ विज़न का प्रमुख आधार भी बना हुआ है। मत्स्य आयुक्त (सीओएफ) द्वारा प्रबंधित यह हार्बर हजारों मत्स्य-जीवियों के जीवन का केंद्र है और समुद्री सुरक्षा दृष्टि से भी अत्यंत रणनीतिक है। जेटी, मरम्मत क्षेत्र, भंडारण प्रणालियों और कटाई-परवर्ती सुविधाओं से लैस जखाऊ को हाल ही में "ब्लू रिवॉल्यूशन" पहल में शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य इसकी अवसंरचनात्मक क्षमता को आधुनिक वैश्विक मानकों तक ले जाना है।
इसी पृष्ठभूमि में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ़्रेंस (वीजीआरसी) जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में राजकोट में आयोजित होने जा रही है। कच्छ और सौराष्ट्र जो अपने समृद्ध मत्स्य संसाधनों, महत्वपूर्ण समुद्री हार्बर्स और मजबूत तटीय अवसंरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, पर इस बार विशेष फोकस रहेगा । यह क्षेत्र न सिर्फ समुद्री मत्स्य क्षेत्र के गतिविधियों और वैल्यू-चेन लॉजिस्टिक्स के प्रमुख द्वार हैं बल्कि भारत की उभरती ब्लू इकोनॉमी के लिए भी महत्वपूर्ण इंजन बन रहे हैं। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं से लेकर उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रमुख हितधारकों तक सभी एक मंच पर आएंगे जिसका उद्देश्य नए निवेश अवसरों, नवाचारों, उभरती तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर एक साझा दृष्टि विकसित करना है।
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