नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम् और आत्मनिर्भर भारत की थीम के साथ 17 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की झांकियां निकाली जायेंगी जिनमें गुजरात की झांकी में तिरंगे की यात्रा और बिहार की झांकी में मखाने की ताकत की झलक दिखाई देगी।
इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और मंत्रालयों की झांकियों में भारत की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम, आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता की सशक्त झलक देखने को मिलेगी। राज्य की झाकियों में गुजरात की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड में यह झांकी 1906 से लेकर 1947 तक राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा दिखायेगी।
'स्वतंत्रता का मंत्र : वंदे मातरम' पर केंद्रित इस झांकी के सबसे अगले हिस्से पर मैडम भीकाजी कामा की प्रतिमा है, जिन्होंने 1906 में 'वंदे मातरम्' के साथ भारतीय ध्वज की परिकल्पना रची थी। झांकी में श्रीमती कामा की प्रतिमा इस ध्वज के साथ दिखाई देगी। झांकी के सबसे पिछले हिस्से पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा चरखे के साथ मौजूद है। दोनों के बीच तिरंगे की यात्रा के पांच महत्वपूर्ण चरणों को दिखाया गया है, जिसमें 1906, 1907, 1917, 1921 और अंतत: 1931 का तिरंगा मौजूद है, जिसे आज़ादी के बाद आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था।
इस बीच, बिहार अपने प्रसिद्ध मखाने पर केंद्रित झांकी प्रस्तुत कर रहा है। बिहार 'मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड' के नाम से अपनी झांकी प्रस्तुत कर रहा है। यह झांकी बिहार के सफेद सोना यानी मखाने के मिथिलांचल से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर एक 'सुपरफूड' के रूप में पहचान बनाने की कहानी को प्रदर्शित करेगी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस झांकी के केंद्र में मौजूद महिला की प्रतिमा मखाना तैयार करने वाली महिला मज़दूरों की मेहनत का प्रतीक है। साथ ही इस झांकी को 21 महिलाओं ने ही मिलकर तैयार भी किया है।
राज्यों की झांकियों में असम की झांकी 'आशारिकांडी' राज्य के टेराकोटा शिल्प ग्राम की पारंपरिक कला को प्रदर्शित करेगी, जबकि छत्तीसगढ़ 'द मंत्रा ऑफ फ्रीडम, वंदे मातरम्' थीम वाली झांकी के साथ स्वतंत्रता की भावना को प्रस्तुत करेगा। हिमाचल प्रदेश 'देव भूमि, वीर भूमि' के रूप में अपनी आध्यात्मिक और वीर परंपरा को सामने लाएगा, वहीं जम्मू-कश्मीर की झांकी में वहां के हस्तशिल्प और लोक नृत्यों की झलक देखने को मिलेगी। केरल 'वॉटर मेट्रो और शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता, आत्मनिर्भर भारत के लिये आत्मनिर्भर केरल' विषय के जरिये आधुनिक विकास को रेखांकित करेगा।
महाराष्ट्र की झांकी 'गणेशोत्सव, आत्मनिर्भरता का प्रतीक' पर केंद्रित होगी, जबकि मणिपुर 'कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक: समृद्धि की ओर' विषय को प्रदर्शित करेगा। नागालैंड की झांकी 'हॉर्नबिल महोत्सव : संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता का उत्सव' पर आधारित होगी।
ओडिशा की झांकी 'मिट्टी से सिलिकॉन तक : परंपरा में जड़ें, नवाचार के साथ उन्नति' के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत और तकनीकी प्रगति का संगम दिखाएगी। पुडुचेरी 'शिल्प, संस्कृति और ऑरोविल की दृष्टि की समृद्ध विरासत' को प्रस्तुत करेगा, जबकि राजस्थान 'रेगिस्तान की स्वर्णिम छाप : बीकानेर स्वर्ण कला (उस्ता कला)' को दर्शाएगा।
तमिलनाडु की झांकी 'समृद्धि का मंत्र : आत्मनिर्भर भारत' विषय पर आधारित होगी और उत्तर प्रदेश 'बुंदेलखंड की संस्कृति' को प्रदर्शित करेगा। पश्चिम बंगाल 'भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की भूमिका' को रेखांकित करेगा, जबकि मध्य प्रदेश 'पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर' को समर्पित झांकी प्रस्तुत करेगा। पंजाब की झांकी में 'श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के शहीदी के 350 वर्ष' को स्मरण किया जायेगा।
केंद्र सरकार और सशस्त्र बलों की झांकियों में भी राष्ट्रीय शक्ति और उपलब्धियों का प्रदर्शन होगा। वायु सेना मुख्यालय की झांकी 'युद्ध के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका' को दर्शायेगी, जबकि नौसेना मुख्यालय की झांकी 'समुद्र से समृद्धि' विषय पर आधारित होगी।
इस बीच, रक्षा मंत्रालय के अधीन त्रि-सेवा झांकी 'ऑपरेशन सिंदूर, संयुक्तता से विजय' थीम पर आधारित होगी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में भारत की वायु सेना, थल सेना और नौसेना के योगदान को दिखाया जायेगा। झांकी में लड़ाकू विमान राफेल, गाइडेड मिसाइल आकाश, वायु रक्षा प्रणाली एस-400 के साथ-साथ पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले उन ठिकानों की छवियां भी बनायी गयी हैं, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नष्ट किया गया था।
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