अहमदाबाद/रायपुर , अक्टूबर 31 -- गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 'एकता परेड' में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी संस्कृति, सृजन और प्रगति के अद्भुत संगम से सबका मन मोह लिया।
छत्तीसगढ़ की झांकी 'बस्तर की धरती - संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा' शीर्षक से प्रस्तुत की गई जिसने न केवल राज्य की जनजातीय परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि बस्तर के विकास की नई कहानी भी बयां की।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और छत्तीसगढ़ की झांकी की कलात्मकता व सशक्त संदेश की विशेष रूप से सराहना की।
झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत 'गौर नृत्य' ने बस्तर की आन-बान और लोक उल्लास की झलक पेश की। पारंपरिक तुरही और नंदी की आकृति ने बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की भावना को अभिव्यक्त किया।
कभी नक्सल प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है।
अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा ने बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता को दर्शाया। संपूर्ण झांकी की सजावट में प्रयुक्त ढोकरा शिल्पकला ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत प्रतिभा और परंपरागत कौशल को उजागर किया।
यह झांकी न केवल अपनी सांस्कृतिक समृद्धि का परिचायक बनी, बल्कि बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी सुनाई। कभी दुर्गम और पहुंच से दूर इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, स्कूलों में घंटियां बज रही हैं और गांवों में बिजली व इंटरनेट की रोशनी नई आशाएं जगा रही है।
महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर हैं जबकि हस्तशिल्प, वनोपज और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। युवाओं में अब बंदूक नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है।
एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा किया गया था। देशभर से राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों ने अपनी थीम व मॉडल प्रस्तुत किए। छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक गहराई और विकास के सजीव चित्रण के आधार पर चयनित किया गया।
अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियां भी शामिल थीं।
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