चेन्नई , फरवरी 17 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के असफल हुए पीएसएलवी-सी62 मिशन में एक नया मोड़ सामने आया है। आरंभिक अनुमान लगाया गया था कि रॉकेट अपने तीसरे चरण के प्रज्वलन के अंतिम में असफल हो गया था लेकिन अब साक्ष्य बता रहे हैं कि पृथ्वी पर वापस गिरने से पहले इसका चौथा चरण प्रज्वलित हुआ था।
रॉकेट अपने साथ प्राथमिक पेलोड के रूप में भारत का महत्वपूर्ण उपग्रह ईओएस-एन1 और भारतीय एवं विदेशी संस्थाओं के 15 अन्य छोटे उपग्रह ले गया था।
रॉकेट के साथ अपना अंतरिक्ष यान 'केस्ट्रल इनिशियल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर' (केआईडी) भेजने वाली स्पेन की अंतरिक्ष कंपनी 'ऑर्बिटल पैराडाइम' ने बताया कि चौथे चरण में थ्रस्टिंग तब शुरू हुई जब, रॉकेट पृथ्वी की ओर वापस गिरने लगा था।
कंपनी ने अपनी रिपोर्ट 'द केआईडी सर्वाइवव्ड' कहा कि तीसरे चरण से अलग होने के बाद, पीएसएलवी ने नीचे गिरते समय चौथे चरण का थ्रस्ट शुरू किया। कंपनी ने कहा कि उसके पास रॉकेट के इस चरण के प्रक्षेपवक्र (ट्राजेक्ट्री) के बारे में कोई सूचना नहीं है। साथ ही इस बारे में सटीक जानकारी भी नहीं है कि ऊपरी चरण ने कब और कहाँ वायुमंडल में फिर से प्रवेश किया।
इसरो ने घोषणा की थी कि पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मिशन को तीसरे चरण के प्रज्वलन के अंत में एक खराबी का सामना करना पड़ा था।
उल्लेखनीय है कि 11 जनवरी, 2026 को हुई इस क्षति के कारण का पता लगाने के लिए अभी एक विश्लेषण समिति का औपचारिक गठन होना बाकी है। इस झटके के बावजूद, केआई़डी कुछ समय के लिए बचा रहा और ऑर्बिटल पैराडाइम को टेलीमेट्री (डेटा) भेजने में सफल रहा।
कंपनी का मानना है कि तीसरे चरण के जलने के अंत में, पीएसएलवी ने संभवतः अपना दिशा नियंत्रण खो दिया था, जिससे उसकी चढ़ाई और कक्षा तक पहुँचने की गति रुक गई।हालांकि फिर भी तीसरा चरण चौथे चरण से अलग हुआ था, जिसके बाद नीचे गिरते समय चौथा चरण प्रज्वलित हुआ।
कंपनी के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने 'ग्राउंड सिस्टम' की जाँच की और केआईडी द्वारा भेजे जाने वाले डेटा का पता लगाया। इस डेटा ने इस बात की पुष्टि की कि केआईडी रॉकेट से अलग हुआ था, क्योंकि केआईडी रॉकेट से अलग होने के बाद ही डेटा भेज सकता है और वह भी तभी जब उसके एंटेना तथा उसके माउंटिंग प्लेन सुरक्षित रहें।
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