भुवनेश्वर , दिसंबर 09 -- लेखा परीक्षा संस्था भारतीय नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने ओडिशा की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में कई कमियों का खुलासा किया है।

सीएजी के 'ओडिशा में स्कूली शिक्षा पर प्रदर्शन ऑडिट' रिपोर्ट के मुताबिक ओडिशा में शिक्षा के अलग-अलग स्तर पर विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की वजह से स्कूली शिक्षा तक सभी की पहुंच का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे में भले ही सुधार हुआ है, लेकिन बड़ी संख्या में स्कूल अभी भी तय बुनियादी ढांचे के बिना चल रहे हैं।

रिपाेर्ट में कहा गया है कि के अनुसार, विद्यालयों में अहम भूमिका निभाने वाले अध्यापक नियमों के मुताबिक स्कूलों में मौजूद नहीं थे, जिससे सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता खराब हो रही थी। ऑडिट में 2018-19 से 2022-23 तक की अवधि को कवर किया गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सभी बच्चों को स्कूली शिक्षा तक पहुंच मिली है या नहीं, और हर स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित की गयी है या नहीं।

ऑडिट में पाया गया कि योजना बनाने में लोगों की भागीदारी नहीं थी और यह नीचे से ऊपर की ओर नहीं बनायी गयी थी। यानी ऑडिट में जिन जिलों को लिया गया, उनमें से किसी में भी जिला स्तरीय नियोजन टीम नहीं बनायी गयी थी। इसी तरह किसी भी ब्लॉक में ब्लॉक स्तरीय नियोजन टीम नहीं बनायी गयी थी। स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग के बजट प्रावधानों और खर्च में लगातार बचत एवं निधि सरेंडर देखा गया, जो पांच प्रतिशत (2022-23) से 18 प्रतिशत (2021-22) तक था। इसमें 2018-23 के दौरान कुल 12 प्रतिशत की बचत/सरेंडर हुआ।

ऑडिट में पता चला कि समग्र शिक्षा योजना के तहत फंड का इस्तेमाल 44 से 50 प्रतिशत के बीच रहा। साल 2018-19 की तुलना में 2022-23 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ोतरी के बावजूद, ओडिशा में माध्यमिक और उच्च-माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के दाखिले की दर में कमी देखी गयी। इसके अलावा, दाखिले की शुद्ध दर में भी राष्ट्रीय स्तर की तुलना में गिरावट दर्ज की गयी। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018-19 से 2022-23 के दौरान माध्यमिक से उच्च माध्यमिक स्तर की ओर बढ़ने वाले बच्चों में राष्ट्रीय स्तर पर जहां बढ़ोतरी देखी गयी, वहीं ओडिशा में इस आंकड़े में गिरावट नज़र आयी।

ऑडिट में यह भी पाया गया कि 2018-23 के दौरान विशेष ज़रूरतों वाले 16,410 बच्चे यातायात के लिये पात्र थे, लेकिन तीन जिलों में 380 (2.3 प्रतिशत) पात्र बच्चे इस फायदे से वंचित रह गये क्योंकि संबंधित विभाग ने भत्ता माता-पिता के बंद या गलत बैंक खातों में डाल दिया था। साल 2018-23 के दौरान 13 से 26 प्रतिशत स्कूलों में रैंप की सुविधा नहीं थी, जबकि 31 से 44 प्रतिशत स्कूलों में विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए अनुकूल टॉयलेट की सुविधा नहीं थी।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 2018-23 के दौरान 22,237 से 21,956 स्कूलों की लड़कियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया था , हालांकि इन आत्मरक्षा कक्षाओं को आयोजित करने के लिये सिर्फ 3,363 से 21,943 स्कूलों को ही वास्तव में फंड दिया गया।

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