सीहोर , जनवरी 06 -- मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक दिग्विजय सिंह के सीहोर जिले के इछावर विधानसभा क्षेत्र से अपनी पदयात्रा का शंखनाद करने के मामले ने राज्य के राजनीतिक हलकों में एक बार फिर सरगर्मी पैदा कर दी है।

ये वो क्षेत्र है, जिसे भारतीय जनता पार्टी का अजेय क्षेत्र माना जाता है। यह वही इलाका है, जहां यहां से आठ बार विधायक रह चुके राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गहरा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यहां से सीधे संघर्ष का ऐलान केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सत्ता को चुनौती देने वाला संदेश माना जा रहा है।

श्री सिंह ने यहां के ग्राम खेरी में एक कार्यकर्ता मांगीलाल पटेल के घर रविवार और सोमवार की दरमियानी रात बिताई और इसके बाद कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गुटबाजी से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। इसके बाद उन्होंने सोमवार दोपहर यहां से पदयात्रा की शुरुआत की।

पदयात्रा की शुरुआत करते ही श्री सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के राष्ट्रपिता का अपमान है। उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि विचारधारा पर हमला बताया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक गांधी का नाम मनरेगा से दोबारा नहीं जोड़ा जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वे गांव-गांव जाकर मजदूरों से मिल रहे हैं, जॉब कार्ड दिखवाकर उन्हें उनके अधिकारों का पाठ पढ़ा रहे हैं।

इसी बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आंदोलन को "भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम" कहा है। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि कांग्रेस संगठन में इस यात्रा से नई जान आएगी।

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