जयपुर , फरवरी 26 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शनिवार को प्रस्तावित अजमेर दौरे से पूर्व उन्हें एकपत्र लिखकर प्रदेश की जनहितकारी योजनाओं की स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए पूर्ववर्ती सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और रद्द कियेगये प्रोजेक्ट्स को उनके मूल स्वरूप में पुनः बहाल करने की मांग की है।

श्री गहलोत ने पत्र में प्रधानमंत्री को उनके 'चित्तौड़गढ़ वाले वादे' की याद दिलाते हुए इन योजनाओं को पुनः बहाल करने की मांग की है। पत्र में लिखा," 28 फरवरी को राजस्थान की पावन धरा अजमेर में आपके आगमन पर हार्दिक स्वागत है, मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान उस 'गारंटी' की ओर आकर्षित करना चाहता हूं जो आपने दो अक्टूबर 2023 को चित्तौड़गढ़ से राजस्थान की जनता को दी थी। 2023 में मैंने राजस्थान की जनता को आगाह किया था कि यदि भाजपा सरकार में आ गई, तो कांग्रेस सरकार की योजनाओं को बंद कर देगी। तब आपने दो अक्टूबर 2023 को स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया था,"भाजपा सरकार बनने पर कांग्रेस की किसी भी जनहितकारी योजना को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें और बेहतर बनाया जाएगा।"उन्होंने पत्र में कहा, " राजस्थान की जनता ने आपके इन शब्दों को 'मोदी की गारंटी' मानकर स्वीकार किया था. परंतु अत्यंत खेद का विषय है कि वर्तमान राज्य सरकार आपके उस वादे के ठीक विपरीत कार्य कर रही है. पिछले दो वर्षों में प्रदेश की वे तमाम योजनाएं, जो देशभर में मॉडल के रूप में जानी जाती थीं और कई अन्य राज्यों ने जिन्हें अपने यहां लागू किया, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या बजट एवं शर्तों में कटौती कर निष्प्रभावी बना दिया गया है, इससे राजस्थान की जनता बेहद परेशान है। मैं आपका ध्यान इन प्रमुख बिंदुओं की ओर दिलाना चाहता हूं। "उन्होंने कहा कि 'राइट टू हेल्थ' देश का पहला स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनने के बाद भी वर्तमान सरकार ने इसके नियम लागू नहीं किये हैं, जिससे जनता को मुफ्त इलाज का कानूनी अधिकार नहीं मिल पा रहा है। गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट ऑनलाइन डिलीवरी पार्टनर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए बनाया गया यह क्रांतिकारी कानून ठंडे बस्ते में पड़ा है। न बोर्ड बना और न ही फंड का लाभ संबंधित लोगों तक पहुंचा। राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस इसका नाम बदलने के साथ ही लाभार्थियों की संख्या 500 से घटाकर मात्र 150 कर दी गयी है, जिससे मेधावी छात्रों के विदेश में पढ़ने के अवसर सीमित हो गये। इंदिरा रसोई योजना इसका नाम बदलकर अन्नपूर्णा रसोई किया गया लेकिन केंद्रों पर कुप्रबंधन के कारण लाभार्थियों की संख्या पहले से लगभग आधी रह गयी है।

इसी तरह इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण देने वाली यह योजना दूसरे चरण में पूरी तरह बंद कर दी गयी है। इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की तर्ज पर शहरों में 125 दिन का रोजगार देने वाली इस योजना का क्रियान्वयन धरातल पर अब लगभग शून्य है। चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा एवं आरजीए़एस इन दोनों योजनाओं में अस्पतालों एवं मेडिकल स्टोर्स को समय पर भुगतान नहीं किये जाने के कारण ये योजनाएं बार-बार संकट में आ जाती हैं। नि:शुल्क बिजली योजना (100 यूनिट) इसे 'पीएम सूर्य घर योजना' की जटिल शर्तों से जोड़ दिया गया है। नये उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा, जिससे मध्यम वर्ग की राहत समाप्त हो गई है। अन्नपूर्णा राशन किट, महंगाई से राहत देने वाले इन किटों का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इंदिरा गांधी क्रेडिट कार्ड योजना बिना ब्याज के 50 हजार रुपये का ऋण देने वाली इस योजना में नये आवेदन लेना बंद कर दिया गया है।

उन्होंने पत्र में लिखा, " प्रधानमंत्री जी, भाजपा सरकार की अदूरदर्शिता के कुछ उदाहरण आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं, हमारी कांग्रेस सरकार के समय जयपुर में बने महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज़ का निर्माण पूरा होने के एक वर्ष बाद भी इसका लोकार्पण नहीं किया गया है. जयपुर में ही कोचिंग संस्थानों को एक स्थान पर लाने तथा कोचिंग संस्थानों की भीड़ से लगने वाले ट्रैफिक जाम से बचाव के लिए नए कोचिंग हब का निर्माण कराया गया था. भाजपा सरकार न तो कोचिंग संस्थानों को वहाँ स्थानांतरित करवा पाई और न ही इस परियोजना का उचित उपयोग कर सकी। अपनी नाकामी छिपाने के लिए इस कोचिंग हब को आईआईटी जोधपुर के रीजनल सेंटर हेतु दे दिया गया, जिससे जयपुर में ट्रैफिक जाम की समस्या और विकटहो गयी है। "उन्होंने पत्र में कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान कोटा में देश का सबसे आकर्षक रिवर फ्रंट बनाया गया, जिसकी चर्चा देश-दुनिया में हुई। वर्तमान सरकार ने इसके रखरखाव तथा आगे के चरणों का कार्य भी रोक दिया है।

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