बेंगलुरु , नवंबर 11 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के पहले मानव-अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के क्रू मॉडयूल के मुख्य पैराशूट का सफल परीक्षण कर लिया है।
इसरो ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह परीक्षण यहां बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 03 नवंबर को किया गया। यह एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट का हिस्सा है, जिसके आधार पर गगनयान मिशन के पैराशूट सिस्टम को मान्यता प्रदान की जायेगी। गगनयान क्रू मॉड्यूल में चार किस्म के कुल 10 पैराशूट हैं। सबसे पहले दो पैराशूट पैराशूट कम्पार्टमेंट के ऊपरी रक्षा कवच को हटाते हैं। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट क्रू मॉड्यूल की गति को धीमी करते हैं और उसे स्थिरता प्रदान करते हैं।
इसके बाद तीन पायलट पैराशूट की मदद से तीन मुख्य पैराशूट बाहर निकलते हैं, जो क्रू मॉड्यूल को और भी स्थिरता प्रदान करते हैं और उसकी गति को कम करते हैं, ताकि मॉड्यूल के समुद्र की सतह पर उतरते समय कम से कम झटका लगे और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित हो सके। गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट एक बार में पूरे नहीं खुलते। ये पहले आंशिक रूप से खुलते हैं और फिर एक तय समय के बाद पूरी तरह खुलते हैं। एक पायरो उपकरण के जरिये इसे नियंत्रित किया जाता है।
इसरो ने बताया कि 03 नवंबर को इस बात का परीक्षण किया गया कि यदि मुख्य पैराशूट के पूरी तरह खुलने में देरी होती है तो उस समय पूरा सिस्टम कितना सुरक्षित है। परीक्षण में पता चला कि तीनों मुख्य पैराशूटों के एक साथ पूरी तरह न खुलने की स्थिति में भी यह सिस्टम मॉड्यूल की स्थिरता सुनिश्चित करने और उसे सुरक्षित रखने में कामयाब रहा है।
परीक्षण के दौरान क्रू मॉड्यूल के बराबर वजन वाली वस्तु को वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया था। पैराशूट सिस्टम तय योजना के अनुसार काम किया और सभी चरण बिना किसी चूक के पूरे किये।
उल्लेखनीय है कि भारत ने साल 2027 में अपना पहला मानव-अंतरिक्ष मिशन भेजने का लक्ष्य रखा है। इसरो ने इस साल अगस्त में बताया था कि इस मिशन की तैयारी से जुड़े 80 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं। शेष 20 प्रतिशत काम मार्च 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है।
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