गांधीनगर , दिसंबर 05 -- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-चक्र का आधार है। विश्वभर में तेजी से घटती भूमि की पोषक क्षमता गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

श्री देवव्रत ने कहा कि ऐसे समय में भूमि सुपोषण अर्थात भूमि को जैविक रूप से पोषित करने की दिशा में राष्ट्रीय अभियान भारत की भविष्य की अन्न-सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। विश्व मृदा दिवस के निमित्त गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, हालोल, पंचमहाल, द्वारा भूमि सुपोषण विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यपाल ने गांधीनगर स्थित लोकभवन से ऑनलाइन माध्यम द्वारा प्रेरक संबोधन किया।

उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता घट रही है, जिससे भूमि की जलधारण क्षमता तथा सूक्ष्मजीवों के प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसी परिस्थिति में प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों का विकास, घनजीवामृत, जीवामृत जैसे प्राकृतिक उपायों द्वारा भूमि को पुनः सुपोषित किया जा सकता है। गुजरात सहित देश के अनेक राज्यों में हुए शोधों में प्राकृतिक खेती के अत्यंत सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। भूमि की उर्वरता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की लागत में कमी आई है और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है।

श्री आचार्य देवव्रत ने कहा कि भूमि सुपोषित होगी तभी अन्न सुपोषित होगा और अन्न सुपोषित होगा, तभी मनुष्य सुपोषित बनेगा। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों और नीति-निर्माताओं को सुझाव दिया कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर भूमि संरक्षण के लिए मजबूत कार्य-योजनाएं तैयार करें। साथ ही उन्होंने प्रसन्नता जतायी कि आज की युवा पीढ़ी भूमि संरक्षण के प्रति संवेदनशील बन रही है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारतएट2047 के लक्ष्य के लिए उत्साहजनक है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल भूमि को जीवंत नहीं करता, बल्कि कृषि को आर्थिक रूप से मजबूत, समाज को स्वस्थ तथा पर्यावरण को सुरक्षित बनाता है। भूमि के स्वास्थ्य का प्रश्न केवल खेती का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य और विकास का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि देशभर के किसान इस अभियान को राष्ट्रहित के मिशन के रूप में स्वीकार करेंगे और विकसित भारत के स्वप्न को मजबूत आधार देंगे।

राज्यपाल ने अंत में सभी आयोजकों और सहभागियों को बधाई देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन भूमि सुपोषण के लिए जारी विभिन्न प्रयासों को नयी दिशा और गति प्रदान करेगा। कार्यक्रम में गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सी. के. टिम्बडिया ने स्वागत सम्बोधन किया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के वैज्ञानिक, किसान तथा विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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