लखनऊ , अप्रैल 25 -- उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे देश को समर्पित करेंगे।
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शुमार है और इसे यूपीडा के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्य सरकार की रणनीतिक योजना का सफल उदाहरण माना जा रहा है। करीब 37 हजार करोड़ की लागत से तैयार इस मेगा प्रोजेक्ट को चार प्रमुख पैकेज (ग्रुप) में विभाजित कर निर्माण कार्य को गति दी गई। 'मल्टी-पैकेज' मॉडल इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ, जिसने इतने बड़े प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाई।
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को चार हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से कार्य कराया गया। पहले पैकेज की लंबाई 129.70 किमी है, जिसकी लागत 9 हजार करोड़ से अधिक है। दूसरे पैकेज की लंबाई 151.70 किमी और लागत लगभग 9 हजार करोड़ है। तीसरे पैकेज की लंबाई 155.70 किमी तथा लागत भी करीब Rs.9 हजार करोड़ निर्धारित की गई। चौथा और सबसे लंबा पैकेज 156.847 किमी का है, जिसकी लागत लगभग Rs.9.5 हजार करोड़ है।
इस मॉडल के तहत विभिन्न डेवलपर्स और ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर्स को समानांतर रूप से काम करने का अवसर मिला, जिससे निर्माण कार्य में उल्लेखनीय तेजी आई और समयसीमा का पालन सुनिश्चित हो । राज्य सरकार ने इस परियोजना को एकल एजेंसी के बजाय कई हिस्सों में बांटकर कार्य शुरू कराया, जिससे एक साथ कई मोर्चों पर काम संभव हुआ। इससे न केवल गति बढ़ी, बल्कि जवाबदेही भी तय हुई।
पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी यूपीडा द्वारा की गई, जिसने डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण के हर स्तर पर सख्ती बरती। नियमित समीक्षा बैठकों, तकनीकी समन्वय और ग्राउंड लेवल मॉनिटरिंग के चलते सभी पैकेज में कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ा।
गंगा एक्सप्रेसवे केवल यातायात को आसान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जो प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देंगे।
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