धमतरी, 09 जनवरी 2026 (वार्ता) छत्तीसगढ़ के गंगरेल बांध से निकलने वाली मुख्य नहर के शुरुआती हिस्से में ही रुद्री ग्राम पंचायत बस्ती का गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जाने का शुक्रवार को आरोप लगाया गया। इस गंदे पानी में नहाने-धोने के साथ-साथ सेप्टिक टैंक से निकला अपशिष्ट जल भी शामिल बताया जा रहा है, जिससे नहर का पानी पूरी तरह दूषित हो रहा है।

धमतरी शहर सहित राजधानी रायपुर और आसपास के चार जिलों को गंगरेल बांध से मुख्य नहर के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जाती है। यह पानी फिल्टर प्लांट में शुद्धिकरण के बाद शहर की टंकियों में भरकर घर-घर पहुंचाया जाता है लेकिन अब इस पूरी आपूर्ति प्रणाली की स्वच्छता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों ने आरोल लगाया है कि इसी दूषित पानी को फिल्टर कर शहर और अन्य जिलों में जलापूर्ति किया जा रहा है। हाल ही में देश के अन्य हिस्सों में दूषित पानी से जुड़ी घटनाओं के बाद यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि क्या वाटर फिल्टर प्लांट मानव अपशिष्ट से निकले सभी हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करने में सक्षम हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के दूषित पानी से जलजनित बीमारियों और महामारी फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भविष्य में कोई बीमारी फैलती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करना भी एक बड़ा सवाल बन गया है। गंदा पानी छोड़ने की जिम्मेदारी जहां रुद्री ग्राम पंचायत की बनती है, वहीं उसे मुख्य नहर से जोड़ने का कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा किया गया है। इसके बाद उसी पानी को शुद्ध कर शहर में सप्लाई करने की जिम्मेदारी धमतरी नगर निगम की है।

मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने दावा किया है कि गंदे पानी को नहर में जाने से रोक दिया गया है। हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। मौके पर नाले में केवल थोड़ी मात्रा में मुरुम डालकर पानी रोकने का अस्थायी प्रयास किया गया है, जबकि नाले से गंदे पानी का बहाव लगातार जारी है।

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