मुंबई , मार्च 10 -- इजरायल-अमेरिका गठबंधन और ईरान के बीच जारी युद्ध और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों पर इसके प्रभाव के चलते फलों और सब्जियों की खेप रायगढ़ जिले के न्हावा-शेवा स्थित जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर फंस गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुस्लिम समुदाय का पवित्र महीना रमजान चल रहा है और इसे खाड़ी क्षेत्र में निर्यात के लिए 'व्यस्ततम समय' माना जाता है। लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान के कारण निर्यातक बेहद मुश्किल स्थिति में हैं।
रमजान के दौरान जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) से ईरान, इराक, सऊदी अरब, कुवैत और दुबई को सबसे अधिक फलों का निर्यात किया जाता है। फिलहाल जहाज वहां नहीं जा रहे हैं। जो जहाज गये थे, वे मौजूदा हालात में वापस नहीं आये।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में प्रमुख केला निर्यातक प्रमोद निर्मल ने बताया कि वहां 600 से अधिक कंटेनर फंसे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जहाजों को 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते भेजा जा रहा है। भारी लागत और ग्राउंड हैंडलिंग शुल्क निर्यातकों की कमर तोड़ रहे हैं और संकट के इस समय में शिपिंग कंपनियां निर्यातकों के प्रति बिल्कुल भी सहानुभूति नहीं दिखा रही हैं।
प्याज के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक विकास सिंह ने कहा कि ईरान का अपना प्याज उत्पादन है , हालांकि अन्य खाड़ी देशों को होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि शिपिंग कंपनियां दोबारा माल लेना कब शुरू करेंगी। इस देरी का न केवल निर्यातकों पर, बल्कि महाराष्ट्र के पूरे कृषि क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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