कलाबुर्गी , दिसंबर 06 -- कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे ने शनिवार को इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों में बहुत देरी और उनके रद्द होने से उपजे जनाक्रोश को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए इसे एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या करार दिया।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एकाधिकार को बढ़ावा देने की वजह से आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मीडिया के सवालों के जवाब में श्री खरगे ने कहा कि इंडिगो के संचालन में आयी व्यापक रुकावटों से हजारों यात्री प्रभावित हुए हैं। यह केवल एक एयरलाइन की समस्या नहीं, बल्कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में केंद्र सरकार की नाकामी का परिणाम है।
उन्होंने कहा, " इन लोगों ने हर क्षेत्र, हर कारोबार, हर सेक्टर को एक-दो लोगों का एकाधिकार बना दिया है और इसका खामियाजा जनता भुगत रही है। " इंडिगो का यह संकट 'कॉर्पोरेट नियंत्रण के अत्यधिक केंद्रीकरण का सीधा परिणाम' है। "श्री खरगे का तर्क था कि जब कोई क्षेत्र एक निजी कंपनी या मुट्ठी भर कंपनियों के दबदबे पर निर्भर हो जाता है, तो छोटी-सी गड़बड़ी भी पूरे देश में भारी असर डालती है।
उन्होंने कहा, " अगर एक एयरलाइन को स्टाफ की कमी, तकनीकी खराबी या परिचालन संबंधी चूक हो जाती है, तो देश भर में लाखों यात्री प्रभावित हो जाते हैं। इससे साबित होता है कि सिस्टम कितनी खतरनाक तरीके से निर्भर हो चुका है। "श्री प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार की नीतियों ने प्रतिस्पर्धा को कमजोर किया है। कुछ कॉर्पोरेट समूहों को आक्रामक विस्तार की छूट दी गयी, जबकि बाकी कंपनियां जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
उन्होंने कहा, " नागरिक उड्डयन हो या दूरसंचार, रिटेल या इंफ्रास्ट्रक्चर-हर जगह प्रतिस्पर्धा के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है। कहीं एकाधिकार, कहीं दो-तीन कंपनियों का वर्चस्व-यही आर्थिक मॉडल इन्होंने बना दिया है। "उन्होंने केंद्र सरकार पर 'पूरी तरह खामोशी' बरतने का आरोप लगाया, जबकि देश भर के हवाई अड्डों पर यात्री फंसे हुए हैं।
श्री खरगे ने कहा, " सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात का है कि सरकार समस्या को स्वीकार तक नहीं कर रही। लोग अपनी मदद खुद करते रहें और एक-दो बड़े खिलाड़ी पूरे सेक्टर की किस्मत तय करते रहें। "श्री खरगे ने इसे 'प्रणालीगत शासन विफलता' करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने में ज्यादा दिलचस्पी रखती है। यह टिप्पणी उप-मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को नेशनल हेराल्ड मामले में मिले नये नोटिस के संदर्भ में आयी।
उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार नोटिस मिलने पर जरूरी जवाब देंगे लेकिन "जब भी भाजपा के पास उड़ानें रद्द होना, महंगाई, बेरोजगारी जैसे जनता को परेशान करने वाले मुद्दों का कोई जवाब नहीं होता, तो वे कांग्रेस नेताओं को नोटिस भेजकर ध्यान भटकाते हैं। यह नया नहीं है।"श्री खरगे ने दोहराया कि असली राष्ट्रीय बहस प्रतिस्पर्धा बहाल करने, नियमन को मजबूत करने और एकाधिकारी नीतियों के दुष्परिणामों से उपभोक्ताओं की रक्षा करने पर होनी चाहिए।
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