नैनीताल , नवम्बर 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने खटीमा के सालभोजी में अतिक्रमण के मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए पश्चिमी वृत्त के वन संरक्षक को निर्देश दिए कि वह अतिक्रमित भूमि का संयुक्त सर्वे कर रिपोर्ट अदालत में पेश करें।

शुभम अग्रवाल की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त साकेत बडोला उच्च न्यायालय में वर्चुअल पेश हुए। उन्होंने खंडपीठ को बताया कि सालभोजी में वर्ष 1966 में 22 लोगों को लीज पर भूमि आवंटित की गई थी लेकिन उक्त भूमि की लीज खत्म हो गई है और 21 लोगों को हटा लिया गया है जबकि एक व्यक्ति बड़े हिस्से पर आज भी काबिज है।

हाल ही में बेदखली के ताज़ा आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस भूमि पर रेलवे, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) वन और राजस्व विभाग को एक साथ सर्वे करना है। सर्वे के लिए उन्होंने अदालत से एक महीने का समय मांगा।

इसके बाद खंडपीठ ने निर्देश दिए कि एक सप्ताह में नोटिस जारी कर सभी महकमे 15 दिन में सर्वे की संयुक्त कार्रवाई अमल में लायें और इसके साथ ही चार सप्ताह में रिपोर्ट खंडपीठ के समक्ष पेश करें।

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