नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- उच्चतम न्यायालय में गत सात दिसंबर को आयोजित कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) 2026 के प्रश्न पत्र और उत्तर के लीक होने के मामले में एक याचिका दायर कर अदालत की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि कथित लीक से पूरे देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता एवं शुद्धता से समझौता हुआ है। इसमें दावा किया गया है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्न पत्र और उत्तर वितरित कर दिए गए थे जिससे कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिला।
अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचित वर्गों से संबंधित सीएलएटी परीक्षा के उम्मीदवारों के एक समूह ने यह याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इस तरह की अनियमितताओं से वंचित वर्गों के छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिन्हें पहले से ही कानूनी शिक्षा प्राप्त करने में संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय से आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए अपनी देखरेख में एक विशेष एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच कराने का निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि अगर जांच में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई जाती है तो पुनर्परीक्षा का निर्देश दिया जाए।
याचिका में क्लैट का संचालन करने वाले राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं मजबूत सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश देने की भी मांग की गई है, जिसमें सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल एवं शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं।
इस मामले को अभी तक उच्चतम न्यायालय की उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना बाकी है।
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