उदयपुर , जनवरी 05 -- प्रख्यात चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा है कि आमतौर पर देखने को मिलता है कि ब्लड बैंक में उपलब्ध रक्त में मौजूद प्लाज्मा को जरूरतमंद रोगी को पूरा चढ़ा दिया जाता है, जिससे इसका रोगी को लाभ कम और नुकसान अधिक होता है।

मरीजों के प्रभावी उपचार के लिए रक्त घटक् में 'क्रार्याे प्रेसिपिटेट' की बढती उपयोगिता पर सरल ब्लड बैंक द्वारा राजस्थान में उदयपुर में आयोजित कार्यशाला मे सोमवार को प्रख्यात चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि इस समस्या को दूर करने के लिए सरल ब्लड बैंक ने अपने यहां क्रायो प्रेसिपिटेट मशीन लगायी है जहां खून का हर घटक अलग करके जरूरतमंद रोगी को वही घटक दिया जाता है जिसकी जरूरत होती है।

कार्यशाला में सरल संस्था के मानद सचिव डा श्याम एस सिंघवी ने बताया कि संस्थान द्वारा 17 से अधिक वर्षाे से संचालित सरल ब्लड बैंक को दक्षिणी राजस्थान का प्रथम ब्लड बैंक होने का सौभाग्य प्राप्त है जिसे क्रायो प्रेसिपिटेट सहित सभी प्रकार के रक्त घटक तैयार करने का लाइसेंस प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि क्रायो प्रेसिपिटेट के लिए संस्थान ने 'रेमी मेक' का अत्याधुनिक थाविंग बाथ उपकरण खरीदा। ब्लड बैंक के अथक प्रयासों के बावजूद रोगियों के उपचार में क्रायो प्रेसिपिटेट को समुचित उपयोग में नहीं लाया जा सका है। इसकेे विपरीत प्लाज्मा को ही वरीयता दी जाती रही जिस वजह से रोगी के शरीर में कई ऐसे तत्व भी चले जाते हैं जिसकी उन्हें आवश्यकता ही नहीं होती है, जो नुकसान का कारण बन सकता है।

कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डा नरेन्द्र मोगरा ने बताया कि क्रायो प्रेसिपिटेट का उपयोग बहुत त्यादा रक्त स्त्राव होने पर, सर्जिकल आकस्मिक गंभीर चोट लगने में, किडनी खराब होने पर किया जाता है। इसके विपरीत प्लाज्मा उपयोग में लेने पर अनावश्यक प्रोटीन, रक्त का थक्का जमने वाले कुछ तत्व भी चले जाते हैं जिसकी वजह से मरीज को नुकसान हो सकता है। डा मोगरा ने बताया कि प्लाज्मा के उपयोग पर 180 मिलीलीटर मात्रा शरीर में जाने की वजह से बच्चे एवं वृद्ध मरीज को रक्त प्रवाह की अधिकता की आशंका रहती है।

कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सक डा बी एस बंब, रक्त चिकित्सा विशेषज्ञ डा संजय प्रकाश, मेडिकल ऑकोलॉजिस्ट डा सचिन जैन, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा एन के जोशी, डा कल्पेश चौधरी एवं अरावली अस्पताल के प्रबंध निदेशक डा आनंद गुप्ता चर्चा में शामिल हुए।

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