चकाई(जमुई), नवंबर 08 -- बिहार में चकाई विधानसभा क्षेत्र जमुई लोकसभा सीट के छह विधानसभा सीटों में से एक है, जहां हर चुनाव में जनता का मिजाज बदल जाता है और एक नई चुनावी कहानी लिखी जाती है।

1962 में बनी इस विधानसभा सीट की सियासत कभी किसी एक दल की लकीर में नहीं बंधी। यही कारण है कि चकाई विधानसभा क्षेत्र की राजनीति बिहार की उन चुनिंदा सीटों में शुमार है जहां के मतदाता की निष्ठा किसी एक पार्टी के प्रति स्थाई नहीं हैं। अब तक हुए 15 विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र पर कई पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों का कब्जा देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी और संयुक्त समाजवादी पार्टी ने शुरुआती तीन चुनाव जीते थे जबकि भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने यहां हैट्रिक लगायी है।

कांग्रेस ने दो और जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यहां एक एक बार जीत दर्ज की है। इन चुनावी परिणामों से यह साफ है कि इस सीट पर पार्टी नहीं, प्रत्याशी की छवि और जनता से जुड़ाव ही जीत की असली गारंटी है। झारखंड की सीमा से सटी यह सीट भौगोलिक रुप से जितनी कठिन है, राजनीतिक रुप से भी उतनी ही पेचीदा है। पिछले चुनावों की तरह ही इस बार भी यहां मुकाबला दिलचस्प है और राज्य की यह हॉट सीट बनी हुई है।

चकाई में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। एक ओर जहां मौजूदा विधायक और बिहार सरकार में विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित कुमार सिहं है, जो इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के आधिकारिक उम्मीदवार हैं, वहीं राजद की ओर से सावित्री देवी फिर से किस्मत आजमा रही हैं जो पिछले चुनाव में महज कुछ वोटों से सुमित कुमार सिंह से पराजित हो गई थी। श्री सिंह पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल करने में सफल हुए थे। इन दोनों के बीच के इस चुनावी जंग को पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर कर त्रिकोणीय बना दिया है। वैसे इस क्षेत्र से कुल 10 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

इस क्षेत्र में जातीय समीकरण भी दिखता रहा है। यहां यादव और मस्लिम समुदाय के सबसे अधिक वोटर हैं, ऐसे में उनका प्रभाव निश्चित तौर पर दिखता है। पिछले कुछ चुनावों में इस इलाके में सड़कों के निर्माण के साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन बेरोजगारी और पलायन की स्थिति अब जस की तस कायम है, जो इस बार यहां चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। चकाई में 11 नवंबर को मतदान होगा। करीब सवा तीन लाख मतदाता अपने पसंद के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे, लेकिन मुकाबला हर बार की तरफ इस बार भी दिलचस्प होने की संभावना है। विगत कुछ वर्षों से देखा गया है कि यहां के मतदाता सोच समझकर मतदान करते हैं। चकाई का चक्रव्यूह इस बार कौन तोड़ने में सफल होगा यह 14 नवंबर को मतगणना के दिन ही साफ हो पायेगा।

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