बैतूल , जनवरी 04 -- कोरोना काल के दौरान देशभर में बंद की गई अधिकांश रेल सेवाएं भले ही अब दोबारा शुरू हो चुकी हों, लेकिन बैतूल जिले के यात्रियों की परेशानी आज भी खत्म नहीं हुई है। जिले से होकर गुजरने वाली तीन महत्वपूर्ण ट्रेनें नागपुर-भुसावल एक्सप्रेस, नागपुर-रीवा एक्सप्रेस और नागपुर-इटारसी पैसेंजर अब तक बहाल नहीं हो सकी हैं। इसके चलते हजारों यात्रियों को रोजमर्रा के सफर में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन ट्रेनों की बहाली को लेकर लंबे समय से जनप्रतिनिधियों और रेलवे प्रशासन से मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। बैतूल, घोड़ाडोंगरी, आमला, मुलताई, बरबतपुर और ढोडरामोहर जैसे रेलवे स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को न तो बंद ट्रेनों की सुविधा मिल पा रही है और न ही अन्य ट्रेनों के नए स्टॉपेज स्वीकृत हो रहे हैं।
नागपुर-भुसावल एक्सप्रेस बैतूल जिले की एकमात्र ऐसी ट्रेन थी, जो नागपुर-इटारसी सेक्शन को खंडवा-भुसावल सेक्शन से जोड़ती थी। इसी ट्रेन के माध्यम से जिले के यात्री सीधे खंडवा स्थित दादाधाम की यात्रा कर पाते थे। इसके बंद होने से धार्मिक यात्रियों को अब अतिरिक्त दूरी और समय खर्च करना पड़ रहा है।
वहीं 22135-22136 नागपुर-रीवा एक्सप्रेस बैतूल जिले के लोगों के लिए रीवा और मैहर शारदा धाम जाने की एकमात्र सीधी ट्रेन थी। इसके बंद होने से श्रद्धालुओं और छात्रों को कई ट्रेनों में बदलाव कर यात्रा करनी मजबूरी बन गई है।
इसके अलावा नागपुर-इटारसी पैसेंजर ट्रेन बैतूल-इटारसी सेक्शन के छोटे रेलवे स्टेशनों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी। यह ट्रेन सभी छोटे स्टेशनों पर रुकती थी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को सुविधा मिलती थी। ट्रेन बंद होने के बाद अब यात्री केवल मेमू ट्रेनों पर निर्भर हैं, जिनकी संख्या और समय सारिणी सीमित है।
रेलवे पीआरओ नागपुर यश जनबंधु ने बताया कि अब ट्रेन संचालन और स्टॉपेज से जुड़े सुझाव मंडल अधिकारियों के बजाय सीधे सांसदों के माध्यम से रेलवे बोर्ड को भेजे जा सकते हैं। यदि क्षेत्रीय सांसद इन मांगों को रेलवे बोर्ड तक पहुंचाएं, तो उन पर निर्णय संभव है।
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