रामनगर , जनवरी 09 -- उत्तराखंड में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में दो जनवरी को एक बुजुर्ग महिला की जान लेने वाले संदिग्ध बाघ को पार्क प्रशासन ने गुरुवार देर रात सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज कर लिया।

यह कार्रवाई कल देर रात करीब 2:30 बजे की गई,बाघ को बेहोश करने के बाद उसे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ और कॉर्बेट पार्क के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ दुष्यंत शर्मा व उनकी टीम द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि दो जनवरी को रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सांवल्दे गांव के जंगल में लकड़ी काटने गई महिला पर बाघ ने हमला किया था, बाघ महिला को घसीटते हुए जंगल के भीतर ले गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। मृतक महिला की पहचान 60 वर्षीय सखियां देवी पत्नी चंदू सिंह, निवासी सांवल्दे गांव के रूप में हुई थी। वह बक्सा समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और रोजाना की तरह गांव की अन्य महिलाओं के साथ घर के पास जंगल में लकड़ी लेने गई थीं।

घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल था। पार्क प्रशासन द्वारा लगातार इलाके की निगरानी की जा रही थी।

श्री राहुल मिश्रा ने बताया कि बाघ को पकड़ने के लिए घटनास्थल के आसपास कैमरा ट्रैप लगाए गए थे, साथ ही पिंजरा भी रखा गया था। कैमरा ट्रैप में जिस बाघ की गतिविधियां लगातार रिकॉर्ड हो रही थीं, उसी के आधार पर आज तड़के उसे ट्रेंकुलाइज किया गया।

उन्होंने बताया कि ट्रेंकुलाइज किया गया बाघ नर मेल टाइगर है, जिसकी उम्र करीब पांच से सात वर्ष के बीच आंकी गई है, फिलहाल बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। बाघ और मृतक महिला के सैंपल सीसीएमबी हैदराबाद भेजे जाएंगे, ताकि डीएनए जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जा सके कि महिला पर हमला करने वाला बाघ यही था या नहीं।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि घटना वाले क्षेत्र में कई अन्य बाघों की भी मौजूदगी थी, लेकिन जिस बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया है, वह कैमरा ट्रैप में बार-बार उसी इलाके में दिखाई दिया था, जहां घटना हुई थी। इसी वजह से उसी बाघ को पकड़ने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि बीते एक सप्ताह से ग्रामीण लगातार बाघ को पकड़ने की मांग कर रहे थे। बाघ के ट्रेंकुलाइज होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल की ओर जाते समय सतर्क रहें और वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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