रामनगर , मार्च 23 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित विश्व प्रसिद् कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढिकाला ज़ोन की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है, जहां महज दो मिनट में बुकिंग फुल होने से पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन कारोबारी भी हैरान हैं।

पयटकों और स्थानीय कारोबारियों ने आरोप लगाये हैं कि बुकिंग सिस्टम में 'परमिट माफिया' सक्रिय हो गया है, जिससे आम लोगों के लिए बुकिंग कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ढिकाला पर्यटन ज़ोन कॉर्बेट पार्क का सबसे चर्चित पर्यटन जोनों में शुमार है, यहां रात्रि विश्राम करना हर किसी के लिए एक सपने जैसा होता है इसीलिए यह जोन की काफी मांग रहती है। यहां ठहरने के लिए गेस्ट हाउस सीमित हैं, इसलिए हर सीजन में यहां बुकिंग के लिए मारामारी रहती है। नियम के मुताबिक हर रविवार सुबह 10 बजे 45 दिन आगे की बुकिंग खुलती है लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बुकिंग खुलते ही दो मिनट के भीतर सारे कमरे फुल हो जाते हैं। ढिकाला में मुख्य कैंप में करीब 20 कमरे ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा सुल्तान में दो, गैरल में छह, खिनानौली में तीन और सर्फदुली रेंज में दो कमरे हैं, साथ ही 20 बेड की डॉरमेट्री भी है। इतने सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी तेजी से बुकिंग होना लोगों के गले नहीं उतर रहा।

स्थानीय पर्यटन कारोबारी अमन खान और अन्य पर्यटन कारोबारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बुकिंग की प्रक्रिया आसान नहीं है, इसमें तारीख चुनना, लोगों की डिटेल भरना, आईडी देना, ओटीपी और कैप्चा जैसी कई स्टेप्स होते हैं, ऐसे में दो मिनट में सब कुछ पूरा हो जाना शंका पैदा करता है। उन्होंने कहा यह मुमकिन ही नही कि दो मिनट में बुकिंग हो जाये।

कारोबारियों का सीधा आरोप है कि इसमें ऑटोमेटेड सिस्टम या बॉट्स का इस्तेमाल हो रहा है। साथ ही अंदरखाने मिलीभगत की भी बात कही जा रही है।

अमन खान का कहना है कि जहां ढिकाला में तीन दिन का स्टे 30-33 हजार रुपये में होता है, वहीं परमिट ब्लैक में तीन से चार लाख रुपये तक बेचे जा रहे हैं। कुछ लोग तो सिर्फ बुकिंग कराने के नाम पर ही 30-40 हजार रुपये ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रामनगर में ही सामान्य सफारी परमिट जिसकी कीमत तीन से 10 हजार होती है, उसे भी 40 हजार रुपये तक में बेचने की चर्चा है।

कारोबारियों का कहना है कि पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया गया था लेकिन अब उसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में ओटीपी सिस्टम जोड़ा गया लेकिन बिना किसी जानकारी के किए गए इस बदलाव ने शक और बढ़ा दिया है।

साथ ही यह भी आरोप है कि बुकिंग का प्लेटफॉर्म एक निजी कंपनी "जीपर" चला रही है और इसी के जरिए ऑटोमेशन या स्पैम का खेल हो सकता है।

वहीं मामले के संज्ञान में आने के बाद कॉर्बेट प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले में कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ साकेत बडोला ने पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह को जांच सौंपी है और जल्द रिपोर्ट देने को कहा है।

वहीं पार्क वार्डन ने जानकारी देते हुए बताया कि दो मिनट में बड़ी संख्या में परमिट बुक होने की बात सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। साथ ही जीपर कंपनी से बिना सूचना ओटीपी सिस्टम जोड़ने को लेकर जवाब मांगा गया है।

प्रशासन का कहना है कि कंपनी का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं स्थानीय कारोबारियों ने साफ कहा है कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और पूरे नेटवर्क को उजागर करेंगे। साथ ही उन्होंने मांग की है कि संदिग्ध बुकिंग को तुरंत रद्द किया जाए।

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