लखनऊ , जनवरी 25 -- संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आर.के. धीमन ने कहा कि भारत में लगभग 63 लाख लोग श्रवण हानि से प्रभावित हैं, जो एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है।
उन्होंने कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी ऐसे लोगों को नया जीवन दे सकती है। प्रो. धीमन रविवार को एसजीपीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित प्रथम कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एसजीपीजीआई उत्तर प्रदेश में इस सेवा को मजबूत करने के लिए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को तैयार है। उन्होंने नवजात शिशुओं की व्यापक श्रवण जांच, शीघ्र निदान और पुनर्वास की जरूरत बताते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के साथ समन्वय की बात कही।
24 और 25 जनवरी को आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन एसजीपीजीआई के हेड एंड नेक सर्जरी विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी के नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागी सर्जनों को टेम्पोरल बोन डिसेक्शन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था। विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से आए 20 सर्जनों ने टेम्पोरल बोन विच्छेदन में भाग लिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रोबोटिक 3डी डिजिटल माइक्रोस्कोप के माध्यम से डिसेक्शन का लाइव प्रदर्शन रहा, जिसे भारत में अपनी तरह का पहला आयोजन बताया गया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. देवेंद्र गुप्ता ने विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए संस्थान में कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम को और मजबूत करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
विभागाध्यक्ष प्रो. अमित केशरी ने बताया कि एसजीपीजीआई में बच्चों और वयस्कों दोनों में नियमित रूप से कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जा रही है। उन्होंने कॉक्लियर इम्प्लांट से जुड़ी तकनीकी बारीकियों और इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला।
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