भरतपुर , मार्च 20 -- 'जंगल का भूत' कहे जाने वाले देश दुनिया के दुर्लभ एवं लुप्तप्राय वन्यजीव कैरकल (सयाहगोश) की राजस्थान में भरतपुर के बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य में मौजूदगी की खबर के बाद वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। अभयारण्य में तेंदुए के सर्वेक्षण के दौरान पहली बार कैमरे में कैरकल की तस्वीर दर्ज हुई है।
वन विभाग के उच्चस्तरीय सूत्रों ने पुष्टि करते बताया कि देश भर में महज 50 से 100 की संख्या के बीच सिमटा यह दुर्लभ वन्यजीव केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के बाद अब बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य में नजर आने से यह साबित होता है कि बंध बारैठा का प्राकृतिक दृश्य अब इतना समृद्ध हो चुका है कि यह करौली और रणथंभौर जैसे क्षेत्रों से आने वाले जीवों को सुरक्षित घर दे रहा है।
अपनी लंबी छलांग और काले झबरीले कानों के लिए पहचाने जाने वाले एवं राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में सिमटे 'जंगल के भूत' का बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य में मिलना केवल एक प्रजाति की खोज नहीं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवित होने का बड़ा प्रमाण है जो भविष्य में यहाँ बाघों जैसे बड़े मांसाहारियों के आगमन की उम्मीद भी जगाता है।
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