नैनीताल , फरवरी 22 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम मंदिर के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के मामले में कैंची धाम ट्रस्ट को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोप लगाने वाले ठाकुर सिंह डसीला को भी नोटिस जारी किया है।
पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला ने उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखकर कैंची धाम मंदिर प्रबंधन में अनियमितताओं को लेकर आरोप लगाये हैं।
उच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर ली और विगत 18 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई की। आदेश की प्रति आज मिल पायी।
सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) सीएस रावत नैनीताल के जिला मजिस्ट्रेट से प्राप्त निर्देशों को अदालत में प्रस्तुत किया।
ऊधर कैंची हनुमान मंदिर और आश्रम के सचिव एवं ट्रस्टी सदस्य ने आरोपों को झूठा बताते हुए ट्रस्ट को याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति मांगी। अदालत ने ट्रस्ट की मांग को स्वीकार कर लिया और प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के निर्देश दे दिए।
साथ ही अदालत ने श्री डसीला को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। अदालत ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बड़थ्वाल को न्यायमित्र भी नियुक्त किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
पत्र में मंदिर ट्रस्ट के नाम, पंजीकरण, ट्रस्टियों की संख्या और नियुक्ति के संबंध में आरोप लगाये गये हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है लेकिन आय व्यय का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
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