तिरुवनंतपुरम , जनवरी 09 -- केरल के सबरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर से कथित रूप से सोने के गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी), कंदारारु राजीव्वरु को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

यह घटनाक्रम भगवान अयप्पा मंदिर से सोने की चोरी के बाद हाई-प्रोफाइल जांच में एक निर्णायक चरण को दर्शाता है जिसने पूरे राज्य का ध्यानाकर्षित किया है।

वरिष्ठ पुजारी को कोच्चि स्थित एसआईटी कार्यालय ले जाया गया, जहां जांचकर्ता उनसे मंदिर में किए गए विवादास्पद स्वर्ण-चढ़ाई कार्यों के दौरान सोने की वस्तुओं को हटाने, प्रमाणित करने और संभालने से संबंधित मामलों पर पूछताछ कर रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड एवं बयानों में तालमेल नहीं स्थापित होने के बाद हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक हो गया।

यह मामला इस आरोप पर केंद्रित है कि 2019 में सोने की परत चढ़ाने के लिए गर्भगृह, दरवाजों के फ्रेम और द्वारपालक मूर्तियों से हटाई गई सोने की चादरें एवं आभूषण पूरी तरह से वापस नहीं किए गए थे।

एसआईटी के अनुसार, सोने के एक हिस्से को तांबा या अन्य निम्न धातुओं के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया होगा, जिससे हेराफेरी आसान हो गई। बताया जाता है कि ये विसंगतियां काम के विभिन्न चरणों में तैयार किए गए दस्तावेजों, इन्वेंट्री सूचियों और सत्यापन रिपोर्टों में सामने आयी।

केरल उच्च न्यायालय इस मामले पर बारीकी से नजर रख रहा है और उसने पवित्र मंदिर की संपत्तियों से जुड़े मामले में जवाबदेही की कमी पर चिंता व्यक्त की थी।

बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने एक व्यापक जांच का आदेश दिया और बाद में आधिकारिक दस्तावेजों और भौतिक निरीक्षण के निष्कर्षों के बीच विरोधाभासों को देखते हुए जांच के दायरे को बढ़ा दिया।

अब तक, एसआईटी ने इस मामले में ठेकेदारों, बिचौलियों और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है जो सोने की परत चढ़ाने की परियोजना से जुड़े हुए थे। अदालतों ने अपराध की गंभीरता, लापता सोने के मूल्य और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावनाओं को देखते हुए मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

जांचकर्ताओं का मानना है कि तंत्री से पूछताछ करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि परंपरागत रूप से अनुष्ठान प्रक्रियाओं और मंदिर से संबंधित कार्यों को मंजूरी देने में उनकी एक आधिकारिक भूमिका होती है।

एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि क्या परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान स्थापित रीति-रिवाजों एवं सुरक्षा उपायों को दरकिनार किया गया या उनका दुरुपयोग किया गया और क्या पर्याप्त सत्यापन के बिना अनिवार्य अनुमोदन प्रदान किया गया।

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