तिरुवनंतपुरम , फरवरी 12 -- केरल मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए केरल पेपर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (केपीपीएल) के विस्तार परियोजना के लिए 741 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राज्य के कागज विनिर्माण क्षेत्र के पुनरुद्धार और विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

परियोजना के पूरा होने और पूर्ण रूप से चालू होने के बाद, केपीपीएल का वार्षिक कारोबार 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस परियोजना को 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विभिन्न उत्पाद खंडों के विविधीकरण के उद्देश्य से यह महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य उद्योग विभाग के तहत कार्यरत वेल्लूर स्थित केपीपीएल में लागू की जाएगी। इस विस्तार से राष्ट्रीय कागज उद्योग में केरल की स्थिति काफी मजबूत होने की उम्मीद है।

उद्योग मंत्री पी. राजीव ने सरकार के इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश में यह पहला उदाहरण है जहाँ किसी राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के बंद पड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का अधिग्रहण किया, उसे सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया और अब उसका बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही है।

केपीपीएल का गठन केरल सरकार द्वारा हिंदुस्तान न्यूज़प्रिंट लिमिटेड (एचएनएल) के अधिग्रहण के बाद किया गया था, जिसे केंद्र द्वारा 2019 में बंद कर दिया गया था।

कुल 741 करोड़ रुपये के निवेश में से 175 करोड़ रुपये राज्य सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी के रूप में दिए जाएंगे, जबकि 25 करोड़ रुपये केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम (केएसआईडीसी) द्वारा प्रदान किए जाएंगे। शेष 541 करोड़ रुपये बैंकों के एक संघ के माध्यम से जुटाए जाएंगे।

देश भर में उच्च गुणवत्ता वाले कागज उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच इस विस्तार का महत्व और बढ़ जाता है। ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी और रिटेल क्षेत्रक में वृद्धि के साथ-साथ प्लास्टिक प्रतिबंध और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद ने उच्च गुणवत्ता के कागज और पैकेजिंग सामग्री की आवश्यकता को तेज कर दिया है।

देश भर में लिखने और छापने के कागज, नोटबुक, पाठ्यपुस्तकों और कार्यालय में उपयोग होने वाले कागज की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है।

केरल के भीतर 'स्पेशलिटी ग्रेड', उच्च गुणवत्ता वाले 'पैकेजिंग ग्रेड' और लिखने-छापने के कागज की भारी दैनिक मांग के बावजूद, राज्य वर्तमान में अन्य राज्यों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर है, जिससे माल ढुलाई की भारी लागत चुकानी पड़ती है।

नयी परियोजना का उद्देश्य स्थानीय औद्योगिक क्षमता का पूर्ण उपयोग करने और बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम करने के लिए एक समर्पित 'पेपर क्लस्टर' विकसित करके इस अंतर को पाटना है।

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