तिरुवनंतपुरम , जनवरी 03 -- केरल सरकार रीढ़ की हड्डी की मांसपेशी (एसएमए) से पीड़ित बच्चों को जीवन प्रदान करने वाला इलाज देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राज्य के प्रमुख दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन के लिए व्यापक देखभाल केंद्र (केअर) परियोजना को और मजबूत करने के प्रस्तावों पर विचार कर रही है।

तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में 'काइकोर्थु' नाम की एक कार्यशाला के बाद स्वास्थ्य विभाग ने केअर परियोजना के दायरे को बढ़ाने पर चर्चा शुरू की है, जिसमें मुफ्त इलाज के लिए उम्र सीमा बढ़ाना और बजट सहायता बढ़ाना शामिल है।

वर्ष 2022 में शुरू हुई केअर परियोजना ने केरल को देश का पहला ऐसा राज्य बनाया जिसने सार्वजनिक भागीदारी मॉडल के जरिए महंगी एसएमए दवाएं मुफ्त में दीं। फिलहाल 12 साल से कम उम्र के 110 बच्चों का इस योजना के तहत इलाज चल रहा है, जिसमें दवा का सालाना खर्च प्रति बच्चा लगभग 50 लाख रुपये होने का अनुमान है। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। तिरुवनंतपुरम के एसएटी अस्पताल में एसएमए क्लिनिक को लॉच होने के कुछ ही महीनों के भीतर केंद्र सरकार द्वारा 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का दर्जा दिया गया है।

केरल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एसएमए मरीजों के लिए जटिल स्कोलियोसिस करेक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक करने वाला पहला राज्य बनकर एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है।

सीयूआरई एसएमए माता-पिता समूह द्वारा उठाई गई मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि सरकार 18 साल की उम्र तक मुफ्त दवा की पात्रता बढ़ाने के प्रस्ताव की जांच कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा की अध्यक्षता वाली विधान सभा समिति की सिफारिश पर विचार कर रहा है कि कार्यक्रम की लंबी अवधि की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 50 करोड़ रुपये का एक समर्पित बजट आवंटित किया जाए।

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