तिरुवनंतपुरम , दिसंबर 16 -- केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में चुने गए प्रतिनिधि 21 दिसंबर को शपथ लेने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।

राज्य चुनाव आयुक्त ए शाहजहां ने यह जानकारी दी है।

राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक स्थानीय निकाय में सबसे वरिष्ठ निर्वाचित सदस्य या पार्षद सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारियों की उपस्थिति में सबसे पहले शपथ लेंगे। नगर निगमों और जिला पंचायतों में जिला कलेक्टरों को शपथ दिलाने का काम सौंपा गया है, जबकि ग्राम और ब्लॉक पंचायतों में संबंधित संस्थानों के नामित रिटर्निंग अधिकारी शपथ दिलायेंगेउन्होंने बताया कि सबसे पहले शपथ लेने वाले सबसे वरिष्ठ सदस्य फिर शेष निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। सभी निर्वाचित सदस्यों को शपथ ग्रहण के संबंध में लिखित सूचना जारी की जायेगी। शपथ ग्रहण समारोह 21 दिसंबर को सुबह 10 बजे ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों, जिला पंचायतों और नगर परिषदों में शुरू होगा , जबकि नगर निगमों में समारोह पूर्वाह्न् 11.30 बजे शुरू होगा।

आयोग के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद सबसे पहले शपथ लेने वाले वरिष्ठ सदस्य की अध्यक्षता में सभी निर्वाचित सदस्यों की पहली बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में सचिव अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव से संबंधित चुनाव आयोग की अधिसूचना पढ़कर सुनाएंगे।

आयोग ने जिला चुनाव अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही की निगरानी करने का निर्देश दिया है कि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हों और आयोग को रिपोर्ट दें।

इस बीच राज्य चुनाव आयुक्त ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को 12 जनवरी, 2026 या उससे पहले अपने चुनाव खर्च के खाते ऑनलाइन जमा करने का निर्देश दिया है। सभी उम्मीदवारों को परिणाम घोषित होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर संबंधित स्थानीय निकाय सचिवों को अपने खर्च के विवरण दाखिल करने होंगे। उम्मीदवारों को आयोग की वेबसाइट पर विवरण जमा करना होगा।

उन्होंने कहा कि जो उम्मीदवार ऑनलाइन खाते जमा करने में असमर्थ हैं, वे बिल, रसीद और वाउचर जैसे सहायक दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से खर्च के विवरण जमा कर सकते हैं। खर्च का हिसाब नामांकन की तारीख से लेकर नतीजों की घोषणा की तारीख तक की अवधि का होना चाहिए और इसमें उम्मीदवार या चुनाव एजेंट द्वारा किए गए खर्च शामिल होने चाहिए।

आयोग ने चेतावनी दी कि चुनाव खर्च का हिसाब जमा न करने पर आदेश की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए स्थानीय निकाय संस्थानों के सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने या बने रहने से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। अगर कोई उम्मीदवार तय खर्च की सीमा से ज़्यादा खर्च करता है या गलत जानकारी देता है, तो भी उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

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