तिरुवनंतपुरम , मार्च 27 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केरल के सहकारिता विभाग में लगभग 700 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला रचा जा रहा है और यह इस क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है।

केरल प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री चेन्निथला ने दावा किया कि प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू करने का प्रोजेक्ट, जिसे मूल रूप से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को सौंपा गया था, विवादास्पद तरीके से रद्द कर दिया गया और बहुत अधिक कीमत पर दोबारा आवंटित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2024 में टीसीएस को राज्य की 4,415 प्राथमिक सहकारी समितियों में कॉमन बैंकिंग सॉफ्टवेयर लागू करने का ठेका 206 करोड़ रुपये में दिया गया था। सभी निर्धारित नियमों और केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करने के बावजूद इस अनुबंध को बाद में रद्द कर दिया गया।

श्री चेन्निथला ने आरोप लगाया कि 03 अप्रैल 2025 को नया टेंडर जारी किया गया, जिसमें पात्रता की शर्तें इस प्रकार बदल दी गईं कि टीसीएस जैसी स्थापित कंपनियां भाग ही न ले सकें। उन्होंने कहा कि केरल में न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या अनिवार्य करने जैसी शर्तों के कारण देश की बड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक आईटी कंपनियां टेंडर में भाग लेने से वंचित हो गईं। जिसके कारण केवल कन्नूर जिले की दो सहकारी समितियां-केरल दिनेश बीड़ी वर्कर्स सेंट्रल कोऑपरेटिव सोसाइटी और मालाबार इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कोऑपरेटिव सोसाइटी- जो सत्तारूढ़ माकपा से जुड़ी बताई जाती हैं-बोली प्रक्रिया में शामिल हुईं। इनमें से दिनेश बीड़ी सहकारी समिति ने केवल 280 समितियों में सॉफ्टवेयर लगाने और सात साल के रखरखाव के लिए 58 करोड़ रुपये का कोटेशन दिया है।

श्री चेन्निथला ने तर्क दिया कि अगर इस दर को पूरे 4,415 समितियों पर लागू किया जाए तो कुल परियोजना लागत लगभग 900 करोड़ रुपये हो जाएगी-जो मूल टीसीएस अनुबंध से चार गुना ज्यादा है - जिससे राज्य के खजाने को 700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रजिस्ट्रार पार्वती नायर की अध्यक्षता वाली तकनीकी मूल्यांकन समिति ने दोनों बोलीदाताओं को तकनीकी रूप से योग्य माना, जिससे चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में सिर्फ एक जिले की दो सहकारी संस्थाओं का भाग लेना "अत्यंत संदिग्ध" है। उन्होंने बताया कि 2016 से ही भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड ने पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के लिए एकीकृत बैंकिंग सॉफ्टवेयर लागू करने का निर्देश दिया था, जिसकी पूरी फंडिंग केंद्र सरकार करती है। अन्य राज्य इस केंद्रीकृत सिस्टम को अपना चुके हैं, लेकिन केरल की पिनाराई विजयन सरकार ने राज्य के सहकारिता क्षेत्र की जटिलता का हवाला देते हुए अपना अलग कस्टमाइज्ड सॉल्यूशन विकसित करने का फैसला किया।

श्री चेन्निथला ने आरोप लगाया कि टीसीएस को ठेका देने में सभी प्रक्रियाओं का पालन किए जाने के बावजूद राजनीतिक दखलंदाजी से अनुबंध रद्द कर दिया गया और टेंडर की शर्तों में हेर-फेर की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारिता विभाग चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान भी इस विवादास्पद अनुबंध को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए चुनाव आयोग से विशेष अनुमति मांगी जा रही है।

उन्होंने इसे वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ राजनीतिक साजिश बताया और कहा कि सत्तारूढ़ माकपा पूरे राज्य की सहकारी संस्थाओं पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहती है। उन्होंने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप कर टेंडर प्रक्रिया रोकने की मांग की और कहा कि वे आयोग को औपचारिक शिकायत देंगे ताकि इस अनुबंध को मंजूरी न दी जाए। उन्होंने जोर दिया कि अगर यूडीएफ सत्ता में वापस आती है तो इस फैसले को रद्द कर दिया जाएगा और मामले की गहन जांच कराई जाएगी।

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