तिरुवनंतपुरम , नवंबर 01 -- केरल पर छह लाख करोड़ रुपये के भारी कर्ज का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को सवाल उठाया है कि राज्य सरकार गंभीर वित्तीय दबाव में रहते हुए नए कल्याणकारी वादों को कैसे पूरा कर सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को सत्ता में 9.5 साल रहने के बाद विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अचानक गरीबों की याद आई है।

श्री चंद्रशेखर ने कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री की तीखी आलोचना की और उन्हें चुनावी नाटक और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 2021 के चुनाव घोषणापत्र से सीधे उठाए गए पुनर्नवीनीकृत वादा करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के अंतिम महीनों में मुख्यमंत्री लंबी नींद से जागे हैं और कहा कि नागरिकों को समर्थन देने के लिए वास्तविक प्रयास स्वागत योग्य हैं लेकिन अंतिम समय में की गई घोषणाओं को ईमानदार शासन नहीं माना जा सकता।

भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री विजयन ने वादा किया था कि सब ठीक हो जाएगा लेकिन उन्होंने यह कभी स्पष्ट नहीं किया कि कार्रवाई प्रशासन के अंतिम महीनों में की जाएगी। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के पहले वर्ष से ही पीएम-किसान और आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं को लगातार लागू किया है।

श्री चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि केरल की अर्थव्यवस्था एक घोटाला-संचालित मॉडल बन गई है, जिसमें महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए निर्धारित धनराशि को अन्यत्र भेज दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य सेवा के लिए निर्धारित धनराशि को पेंशन में बदला जा रहा है, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए धनराशि को भ्रष्ट बिचौलियों के माध्यम से गबन किया जा रहा है तथा आवास, पेयजल और स्कूलों के लिए आवंटित धनराशि को ब्याज चुकाने में लगाया जा रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य पर छह लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने के कारण अधिकांश नयी घोषणाओं के लागू होने की संभावना नहीं है और मुख्यमंत्री फिर से केंद्र पर इसका दोष मढ़ेंगे। श्री चंद्रशेखर ने केरल सरकार से आग्रह किया कि अगर वह वास्तव में बुजुर्गों और गरीबों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है तो उसे आयुष्मान भारत योजना को पूरी तरह से लागू करना चाहिए, जिसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नाटक, जनसंपर्क अभ्यास और भ्रष्टाचार से विकास नहीं होता है बल्कि केवल लोगों की बुद्धिमत्ता का अपमान होता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित