अलाप्पुझा , जनवरी 19 -- केरल के संस्कृति मामलों के मंत्री साजी चेरियन ने उत्तरी केरल के कुछ हिस्सों में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को सांप्रदायिक मतगणना पैटर्न से जोड़कर एक राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
विपक्षी कांग्रेस और अन्य संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नेताओं ने उनकी टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन पर केरल के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने का आरोप लगाया।
श्री चेरियन के अनुसार कासरगोड नगरपालिका और मलप्पुरम जिले के कुछ इलाकों सहित कुछ स्थानीय निकायों के चुनाव नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि मतगणना पहचान के आधार पर हुई है, जो उनके अनुसार इन क्षेत्रों से चुने गए लोगों के नामों से साफ है। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा कि केरल को देश के अन्य हिस्सों की तरह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की ओर बढ़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ऐसे रूझानों को राज्य की धर्मनिरपेक्ष भावना के लिए एक गंभीर चुनौती बताया।
श्री चेरियन ने 39 सीटों वाली कासरगोड नगरपालिका के नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्ष राजनीति का दावा करने वाली पार्टियां खास फायदा नहीं उठा पाईं। उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को एक सीट और कांग्रेस को दो सीटें मिलने का जिक्र किया। जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसके विपरीत 12 सीटें जीतीं और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) 22 सीटों पर विजयी रही।
श्री चेरियन का मानना है कि राजनीतिक पार्टियां बड़े पैमाने पर धार्मिक आधार पर समर्थन जुटा रही हैं, जिसमें भाजपा हिंदू-बहुल इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर रही है और आईयूएमएल मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में फायदा उठा रही है। उन्होंने ऐसे पैटर्न को चिंता का विषय बताते हुए राजनीति में बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खिलाफ चेतावनी दी।
श्री चेरियन की इन टिप्पणियों की विपक्षी कांग्रेस और अन्य संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नेताओं ने कड़ी आलोचना करते हुए माकपा के नेतृत्व वाले वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) पर विभाजनकारी बयान देने और केरल के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने का आरोप लगाया।
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