तिरुवनंतपुरम , फरवरी 08 -- केरल फोकलोर अकादमी द्वारा आयोजित केरल अंतरराष्ट्रीय लोक महोत्सव ने राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम को वैश्विक सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लोक परंपराओं के जीवंत संगम ने शहर को इन दिनों वैश्विक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का केंद्र बना दिया है।
अफ्रीका, रूस, स्पेन, ब्राज़ील, चीन और मिस्र से आए कलाकारों के साथ-साथ देश के 16 राज्यों के लोक कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला रूपों की मनमोहक प्रस्तुतियां दे रहे हैं। दर्शकों को विभिन्न संस्कृतियों की झलक एक ही मंच पर देखने का दुर्लभ और जीवंत अनुभव मिल रहा है।
इस महोत्सव की एक प्रमुख विशेषता केरल की आदिवासी कला परंपराओं का पहली बार एक ही मंच पर सामूहिक प्रस्तुतीकरण है, जिसने सांस्कृतिक विविधता को नया आयाम दिया है। केरल फोकलोर अकादमी के अध्यक्ष ओ. एस. उन्नीकृष्णन ने बताया कि अकादमी द्वारा आयोजित यह पहला अंतरराष्ट्रीय लोक महोत्सव है, जिसे उत्कृष्ट समन्वय और कुशल प्रबंधन के साथ संपन्न किया जा रहा है।
शनिवार को हुए कार्यक्रमों में घाना का 'अक्वाबा', ओडिशा का 'रानापा नृत्य', झारखंड का 'गोंड मारिया नृत्य', कर्नाटक का 'सिद्दी नृत्य' और केरल की पारंपरिक विधाएं कक्कारिस्सी नाटकम, विल्पट्टु, कालट्टम, मुडियेट्टम, कंबुकली, चाविट्टू नाटकम और मलापुलया अट्टम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रविवार के प्रमुख आकर्षणों में रूसी सांस्कृतिक दल द्वारा 'रूसी बैले', अंतरराष्ट्रीय समूह की 'अल्ट्रा वायलेट बटरफ्लाई विंग्स डांस', महाराष्ट्र का 'पहाड़ी गोंधी मारिया नृत्य', असम का 'बीहू नृत्य', छत्तीसगढ़ का 'गोंड मारिया नृत्य' और केरल की प्रस्तुतियां कोल्कली, राजसूयम कोल्कली, करिम्पोली बैंड, इरुला गीत-नृत्य, सीताकली और मालावेट्टु मंगलमकली शामिल हैं।
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