अलप्पुझा , फरवरी 21 -- केरल के एक सरकारी अस्पताल की लापरवाही से एक महिला के पेट में सर्जिकल उपकरण छूट जाने की घटना में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो गयी है।
इस लापरवाही का खुलासा ऑपरेशन के पांच साल के बाद हुआ जब इसकी पुष्टि हुई कि मई 2021 में इसी अस्पताल में हुए एक ऑपरेशन के समय से पुन्नप्रा की रहने वाली उषा जोसेफ के पेट में एक चिमटी मौजूद है।
पुलिस ने यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व प्रमुख डॉ. ललिताम्बिका करुणाकरण को मानवीय जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए दर्ज की गयी प्राथमिकी में मुख्य आरोपी बनाया है।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद शिकायत दर्ज की गयी और उसी आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। जांचकर्ता अस्पताल के रिकॉर्ड, सर्जरी के नोट्स और ऑपरेशन थियेटर के प्रोटोकॉल की जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उपकरण पेट में कैसे छूट गया और करीब पांच वर्षों तक इस चूक का पता क्यों नहीं चला, जबकि इस दौरान मरीज ने लगातार बेचैनी और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया।
इस खुलासे के बाद विभाग ने भी त्वरित कार्रवाई की है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने 2021 में सर्जरी करने वाली डॉ जे शाहिदा को जांच चलने तक निलंबित कर दिया है।
ऑपरेशन थियेटर में प्रक्रिया के दौरान मौजूद सहायक नर्स पीएस धन्या को भी मेडिकल कॉलेज अधिकारियों की ओर से सौंपी गयी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि ये निलंबन अंतरिम अनुशासनात्मक उपायों का हिस्सा हैं, जबकि विस्तृत जांच अभी जारी है।
अस्पताल और सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक और विस्तृत दोनों तरह की विभागीय जांच शुरू कर दी गयी है। एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जो यह जांच करेगी कि क्या अनिवार्य सर्जिकल सुरक्षा प्रोटोकॉल (जैसे उपकरणों की गिनती की प्रक्रिया और सर्जरी के बाद सत्यापन प्रणाली) का पालन किया गया था और विशिष्ट कमियों एवं जिम्मेदारी की पहचान की जायेगी।
इस बीच उपकरण का पता चलने के बाद उषा जोसेफ को बेहतर उपचार के लिए अमृता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सफल सर्जरी के जरिये शनिवार को उनके पेट से चिमटी निकाल ली गयी है। चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि उनकी स्थिति स्थिर है और सर्जरी के बाद निगरानी में हैं।
इस घटना ने व्यापक जन आक्रोश और राजनीतिक विरोध को जन्म दिया है। भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राज्य स्वास्थ्य मंत्री के आवास के सामने माल्यार्पण कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी सरकार की है। इसके साथ ही जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले से निपटने के तरीके की तीखी आलोचना की है और पीड़ित के लिए पर्याप्त मुआवजे तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर तत्काल सुधारात्मक उपायों की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों और आलोचकों ने शल्य चिकित्सा सुरक्षा तंत्र में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है और सवाल उठाया है कि मरीज के बार-बार बेचैनी की शिकायत किये जाने के बावजूद इतने वर्षों तक इतनी बड़ी चूक क्यों पकड़ में नहीं आयी? उन्होंने व्यवस्थागत सुधारों की मांग की है, जिसमें शल्य प्रक्रियाओं की सख्त निगरानी, सर्जिकल सुरक्षा चेकलिस्ट का अनिवार्य अनुपालन, समय-समय पर ऑडिट, जवाबदेही के मजबूत ढांचे और सरकारी अस्पतालों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा उपायों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि व्यापक जांच चल रही है। निष्कर्षों के आधार पर इस प्रक्रिया में शामिल अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जैसे-जैसे सबूत सामने आयेंगे और बयान दर्ज किये जायेंगे। प्राथमिकी में और भी नाम जोड़े जा सकते हैं।
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