लखनऊ , जनवरी 12 -- किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) परिसर में 9 जनवरी को हुई तोड़फोड़ और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटना को लेकर शिक्षक, रेजीडेंट्स, नर्सिंग व कर्मचारियों की संयुक्त समिति ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। समिति ने निर्णय लिया है कि यदि 24 घण्टे के अंदर एफआईआर नही दर्ज होती है तो 13 जनवरी से ओपीडी को बंद कर दिया जाएगा।

माना जा रहा है कि संयुक्त समिति की तरफ से यह निर्णय प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए लिया गया है। फिलहाल, यदि ओपीडी बंद हुई तो इससे हजारों मरीज प्रभावित होंगे क्योंकि केजीएमयू में प्रतिदिन की ओपीडी 5 से 6 हजार के बीच होती है।

सोमवार को इस बाबत शिक्षक संघ सहित कर्मचारी संघ व अन्य संघों की बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि घटना के दिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रॉक्टर के माध्यम से चौक थाने में तहरीर दी गई थी, लेकिन 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पूरे मामले में असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होने से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है। समिति ने चिंता जताई कि जब कुलपति और अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो शिक्षकों, रेजीडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा की बात करना कठिन है।

बैठक में मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों में ओपीडी बंद करने की मांग उठी, लेकिन बाहरी मरीजों के हित में 24 घंटे का अल्टीमेटम देने का निर्णय लिया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि अगले 24 घंटे में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की जाती तो 13 जनवरी से आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर ओपीडी सेवाएं बंद रखी जाएंगी। इस बीच आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए 13 जनवरी को दोपहर 2 बजे संयुक्त समिति की बैठक पुनः होगी।

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