श्रीगंगानगर , जनवरी 10 -- राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं श्रीगंगानगर जिला कांग्रेस कमेटी के प्रभारी जिया उर रहमान ने आरोप लगाया है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के साथ ही इसके प्रावधानों में फेरबदल करके इसे पहले से काफी कमजोर बना दिया है।

श्री रहमान ने शनिवार को राजस्थान में श्रीगंगानगर में पत्रकारों से कहा कि इस योजना में रोजगार की गारंटी को करीब-करीब समाप्त कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों और अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर ली है, जिसकी शुरुआत राजस्थान में भी रविवार से हो रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा में किये गये संशोधनों से योजना की मूल भावना को ही नष्ट कर दिया है। पहले जहां योजना में प्रति वर्ष 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा किया गया है, लेकिन यह सिर्फ दिखावा है। केंद्र ने राज्यों के साथ बजट साझेदारी के पुराने अनुपात को बदल दिया है। पहले जहां केंद्र 90 प्रतिशत और राज्य 10 प्रतिशत का योगदान देते थे, वहीं अब इसे 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य कर दिया गया है। इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, खासकर जब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद केंद्र से राज्यों को मिलने वाली राशि में पहले ही भारी कटौती हो चुकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन बदलावों की आड़ में मनरेगा जैसी गारंटी वाली योजना को पूरी तरह समाप्त करने की साजिश रच रही है, ताकि चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा सके और गरीबों के हितों की अनदेखी की जा सके।

श्री रहमान ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध से की जाएगी। यह उपवास गोल बाजार में स्थित गांधी चौक में आयोजित किया जाएगा, जहां कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता मनरेगा संशोधनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से मजदूरों और किसानों से संपर्क किया जाएगा, ताकि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किये गये बदलावों के बारे में जागरूक किया जा सके। अभियान में यह बताया जाएगा कि इन संशोधनों से उनकी मजदूरी, रोजगार की उपलब्धता और समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि आंदोलन को और तेज करने के लिए 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किये जाएंगे। इसके बाद 31 जनवरी से छह फरवरी तक जिला स्तर पर 'मनरेगा बचाओ' धरना दिया जाएगा। आंदोलन का चरम सात फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव केरूप में होगा। फिर 16 फरवरी से 25 फरवरी तक क्षेत्रीय स्तर पर अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की रैलियां आयोजित की जाएंगी, जो पूरे देश में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगी। श्री रहमान ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ मनरेगा के बचाव के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की रक्षा और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई है।

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