नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर मणिपुर में सेना के ट्रक जलाए जाने और 22 जवानों के मारे जाने संबंधी अफवाहों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए पहले से ही संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच इस तरह के झूठ फैलाने के खिलाफ चेतावनी दी है।
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में एक बम विस्फोट में दो बच्चों की मौत के बाद व्याप्त तनाव के बीच पाकिस्तानी प्रचार नेटवर्क ने राज्य में भारतीय सेना के ट्रकों को जलाए जाने और 22 जवानों के मारे जाने के मनगढ़ंत दावे प्रसारित करना शुरू कर दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट में सेना के ट्रकों में आग लगाने की फर्जी अफवाहें फैलाई जा रही थीं। जलते हुए ट्रकों की कई तस्वीरें साझा की जा रही थीं। एक पोस्ट में कहा गया, "मणिपुर में स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना के वाहनों को आग लगा दी।"एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "मणिपुर में झड़पें चल रही हैं, लोगों ने भारतीय सेना के ट्रकों में आग लगा दी, जिसमें 22 भारतीय सैनिक मारे गए।"एक और पोस्ट के अनुसार, "स्थानीय लोगों विरोध के बाद भारतीय सेना ने मणिपुर में तेल के ट्रकों को उड़ा दिया। आलोचक सेना को आतंकवादी बल कह रहे हैं।"इन अफवाहों का खंडन करते हुए पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की फैक्ट चेक टीम ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "पाकिस्तानी प्रचार नेटवर्क यह दावा कर रहे हैं कि भारतीय सेना के ट्रकों को आग लगा दी गई, जिससे भारतीय सेना के 22 कर्मियों की मौत हो गई। यह दावा फर्जी है। यह जानबूझकर किया गया एक दुष्प्रचार है जिसका उद्देश्य भ्रम पैदा करना और तनाव भड़काना है। हमेशा आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करें। असत्यापित सामग्री साझा न करें।"हाल ही में हुए बम हमले के बाद भड़की अशांति के जवाब में मणिपुर अधिकारियों ने पांच जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तीन दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।
गृह विभाग द्वारा सात अप्रैल को इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में यह प्रतिबंध लागू करने का आदेश दिया गया था। बिष्णुपुर जिला, जहां मंगलवार आधी रात के कुछ समय बाद विस्फोट हुआ था, वहां कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।
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