चंडीगढ़ , नवंबर 20 -- केंद्र सरकार के 15वें वित्त आयोग ने पंजाब की ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए 332 करोड़ रुपये के अनुदान जारी किये हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न विकास और स्वच्छता परियोजनाओं को निधि देना है। ये आवंटन केंद्र सरकार के नियमित, फॉर्मूला-आधारित वितरण का हिस्सा हैं, न कि पंजाब राज्य सरकार की किसी विशिष्ट योजना का।

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष, परमजीत सिंह कैंथ ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर इन निधियों के स्रोत के बारे में 'धोखाधड़ी' और 'खुलेआम झूठ' बोलने का आरोप लगाया है। कैंथ के अनुसार, राज्य सरकार के मंत्री इन फंडों को अपनी सरकार की उपलब्धि बताकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।

कैंथ ने स्पष्ट किया कि ये फंड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा 70:20:10 के अनुपात में सीधे ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को दिए जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन फंडों के उपयोग की निगरानी एक डिजिटलीकृत, पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से की जाती है। भाजपा नेता ने पंजाब सरकार पर खराब वित्तीय स्थिति और केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए धन पर राजनीति करने का आरोप लगाया, और इस तरह के व्यवहार को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि 332 करोड़ रुपये का यह फंड विशेष रूप से पंजाब में ग्रामीण विकास, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए है।

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