बेंगलुरु , जनवरी 03 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए गाँवों से शक्तियों को छीनने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया।
श्री सिद्दारमैया ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को 'वापस लेने' का अनुरोध करते हुए कहा, "राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना या जनता की राय लिए बिना मनरेगा को खत्म करना और 'वीबी- जीरामजी' के नाम से एक नया कानून लागू करना, मोदी सरकार के तानाशाही दृष्टिकोण को दर्शाता है।"मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने काम के अधिकार, सूचना के अधिकार और शिक्षा के अधिकार जैसी क्रांतिकारी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "इन जन-केंद्रित कानूनों को वापस लेकर मोदी सरकार कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है।"मनरेगा के तहत देश भर में लगभग 12.16 करोड़ श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें 6.21 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। अकेले कर्नाटक में 71.18 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें से 36.75 लाख महिलाएं हैं, जो कुल संख्या का 51.6 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया कानून रोजगार को केवल अधिसूचित क्षेत्रों तक सीमित करता है, जिससे गाँवों के लिए काम की गारंटी खत्म हो जाती है और स्थानीय आर्थिक गतिविधियाँ कम हो जाती हैं।
श्री सिद्दारमैया ने नए कानून की आलोचना करते हुए कहा कि यह मजदूरी के न्यूनतम 100 दिनों के काम में कटौती करता है, कृषि मौसम में रोजगार को प्रतिबंधित करता है और मजदूरी वितरण तंत्र को कमजोर करता है।
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