हैदराबाद , जनवरी 04 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) केंद्रीय समिति की सदस्य टी. ज्योति ने केंद्र सरकार की कॉरपोरेट-संचालित, विकलांगता विरोधी और सांप्रदायिक नीतियों के खिलाफ निरंतर संघर्ष का आह्वान किया है।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में रविवार को सुंदरैया विज्ञान केंद्र में 'केंद्र सरकार की नीतियां - विकलांग व्यक्तियों पर प्रभाव' विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि वीबी-जी रामजी विधेयक को वापस नहीं ले लिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करता हैसुश्री ज्योति ने केंद्र सरकार पर श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों को कम करने, ग्रामीण रोजगार का बोझ राज्यों पर डालने और मनरेगा के तहत एक वैधानिक व मांग-आधारित अधिकार को प्रशासन-संचालित योजना में बदलने का आरोप लगाया।

माकपा नेता ने चेतावनी दी कि प्रस्तावित बदलावों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान होगा और इसका सबसे बुरा असर विकलांगों, एकल महिलाओं, बुजुर्गों, आदिवासियों और गरीबों पर पड़ेगा।

सुश्री ज्योति ने बीमा जैसे क्षेत्रों को 100 प्रतिशत विदेशी निवेश के लिए खोलने, बिजली उत्पादन में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और जन-विरोधी नीतियां लागू करने के कदमों की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को कौड़ियों के दाम पर कॉरपोरेट घरानों को सौंपा जा रहा है।

लुई ब्रेल की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज (एनपीआरडी) के प्रदेश महासचिव एम. अदीवैया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है, जबकि राज्य सरकार विकलांगता पेंशन में वृद्धि न करके उन्हें धोखा दे रही है।

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