मैनपुरी , नवम्बर 19 -- उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि केंद्र-प्रदेश सरकार दिव्यांगजन सशक्तिकरण के प्रति समान रूप से संवेदनशील, प्रतिबद्ध हैं एवं दिव्यांगों के हितार्थ संचालित योजनाएं दिव्यांगों की जीवन यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

श्री कश्यप बुधवार को विकास भवन में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की संचालित योजना विवाह पुरस्कार प्रोत्साहन, दुकान संचालन एवं निर्माण योजना के 05-05 लाभार्थियों, 25 लाभार्थियों को एम.आर. किट, 60 दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, 05 लाभार्थियों को बैसाखी उपलब्ध करा रहे थे।

जनपद के प्रभारी मंत्री ने कहा कि दिव्यांग भाई-बहन किसी भी प्रकार से सामान्य व्यक्तियों से कम नहीं हैं, ईश्वर ने उन्हें विशिष्ट क्षमताओं से संपन्न बनाया है, जिसके आधार पर वह जीवन में उच्चतम सफलताएँ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण स्वरूप कहा कि जगतगुरु रामभद्राचार्य जो 02 वर्ष की आयु में दृष्टिबाधित हो गए थे, उन्होने अपने जीवन में 18 भाषाओं का ज्ञान अर्जित किया, 220 से अधिक ग्रंथों की रचना की और भारत का पहला निजी दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया, लगभग 500 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति उन्होने प्रदेश सरकार को निःशुल्क समर्पित की ताकि दिव्यांगजन शिक्षा और सशक्तिकरण का यह महान कार्य आगे भी निरंतर चलता रहे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्यांगजन कल्याण के लिए अभूतपूर्व पहल की गई, वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में दिव्यांगों को केवल 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती थी, जिसे प्रदेश सरकार ने बढ़ाकर एक हजार रुपये प्रतिमाह करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी द्वारा दिव्यांगजन की सुविधा के लिए रू. 32.50 करोड़ की लागत से 08 लाख 08 हजार दिव्यांगजनांे को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई, जिससे उन्हें रोजगार, शिक्षा और दैनिक जीवन की गतिविधियों में बड़ी राहत मिली है, दिव्यांगों हेतु दुकान संचालन के लिए 10 हजार रुपये तथा दुकान निर्माण हेतु 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है ताकि दिव्यांगजन स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें, विवाह पुरस्कार योजना के अंतर्गत दंपति दिव्यांग होने की दशा में 35 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है ताकि उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत मजबूत, सम्मानजनक बन सके, दिव्यांग बच्चों हेतु 03 से 07 वर्ष की आयु तक बचपन डे केयर सेंटर की व्यवस्था की गई है, जिसमें पढ़ाई, भोजन, आवागमन, देखभाल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का संपूर्ण खर्च विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

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