नयी दिल्ली , जनवरी 05 -- केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद ( सीएसआईआर)-राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (एनपीएल) में "राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला" और " सोलर सेल समायोजन के लिए राष्ट्रीय आधारभूत मानक केंद्र " का उद्घाटन किया।
राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला दुनिया में अपनी तरह की दूसरी और सोलर सेल मापांकन मानक केंद्र विश्व में पांचवीं बड़ी सुविधा बतायी जा रही है।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार डॉ सिंह ने सीएसआईआर-एनपीएल के 80वें स्थापना दिवस के अवसर पर इन सुविधाओं का उद्घाटन किया।
डॉ सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जहां "राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला" भारत के लिए पर्यावरणीय प्रशासन व्यवस्था में एक बड़ी छलांग है, वहीं "सौर सेल की मानक मापांकन सुविधा" भारत को सौर सेल माप-तौल विज्ञान के क्षेत्र में शीर्ष देशों की कतार में पहुंचा दिया है। उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों को "20वीं और 21वीं सदी के भारत के स्मारक" बताते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर -एनपीएल जैसी प्रयोगशालाएं स्वतंत्रता से पहले की नींव से लेकर वैश्विक तकनीकी नेतृत्व तक भारत की वैज्ञानिक यात्रा का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी सुधार भारत के सामाजिक-आर्थिक भविष्य को आकार देने वाले प्रमुख चालक होंगे।
सीएसआईआर-एनपीएल की अनूठी विरासत को याद करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह प्रयोगशाला स्वतंत्रता से पहले ही चालू थी और बाद में स्वतंत्रता के बाद भारत की वैज्ञानिक वास्तुकला का एक अभिन्न स्तंभ बन गई। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर देश की आजदी के पहले से है तथा एनपीएल के साथ यह 37 सीएसआईआरप्रयोगशालाओं में सबसे बड़े "भाई-बहन" में से एक है।
इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने याद किया कि इस प्रयोगशाला को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और सरदार वल्लभभाई पटेल सहित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेताओं द्वारा मार्गदर्शन दिया गया था, और एनपीएल को एक ऐसा विशिष्ट संस्थान बताया जहां इतिहास और विज्ञान मिलते हैं।
मंत्री ने कहा, "दशकों तक, देश का आधा हिस्सा एनपीएलमें रखी परमाणु घड़ी के साथ अपनी घड़ियों को मिलाता था," भारतीय मानक समय (आईएसटी) स्थापित करने में प्रयोगशाला की भूमिका को रखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस योगदान ने चुपचाप लेकिन गहराई से भारत में रोजमर्रा की जिंदगी को आकार दिया और विज्ञान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना हुआ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे संस्थानों को छात्रों और नागरिकों को ऐतिहासिक स्मारकों की तरह दिखाया जाना चाहिए, ताकि वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रेरित किया जा सके और युवा दिमागों को विज्ञान और नवाचार के लिए अपनी योग्यता खोजने में मदद मिल सके।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की महानिदेशक एन. कलैसेल्वी ने राष्ट्र की सेवा के 80 साल पूरे होने पर एनपीएल बिरादरी को बधाई दी। उन्होंने संस्थान से कहा कि वह अपने हर चुने हुए क्षेत्र में दुनिया में नंबर वन बनने का लक्ष्य रखे। उन्होंने एनपीएल की एटॉमिक घड़ियों के रणनीतिक महत्व पर भी ज़ोर दिया, और कहा कि वे जीवीए न होने की स्थिति में भी राष्ट्रीय टाइमकीपिंग में मदद करती रहेंगी।
इस कार्यक्रम के दौरानएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान ( सीएसआईआर -सीआईएमएपी) और सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा मिलकर विकसित किए गए चौदह फाइटोकेमिकल भारतीय निर्देशक द्रव्य (बीएनडी) जारी किए गए। इसके साथ ही दो गैस बीएनडी और एक सिलिका फ्यूम बीएनडी भी जारी किया गया, जिससे भारत के क्वालिटी एश्योरेंस और मेट्रोलॉजिकल ट्रेसेबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूती मिली।
मंत्री की उपस्थिति में स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और छोटे मझोले उद्यामों की मदद के लिए कई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एमझौते भी किए गए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित