नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- लोकसभा में गुरूवार को वर्ष 2025-26 के लिए पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण में भारत के कृषि और खाद्य प्रबंधन क्षेत्र में पिछले दशक के दौरान व्यापक बदलाव और अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है और प्याज के वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सब्जियों, फलों एवं आलू की पैदावार के मामले में भी भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है। ये उपलब्धियां बागवानी क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति, खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग को पूरा करने में इसकी बढ़ती भूमिका और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन में उपलब्ध अवसरों को दर्शाती हैं।

इस सर्वेक्षण में बताया गया है कि कृषि वर्ष 2024-25 में बेहतर मानसून के परिणामस्वरूप भारत की खाद्यान्न पैदावार रिकॉर्ड 3,577.3 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के उत्पादन की तुलना में 254.3 लाख टन अधिक है। इस पैदावार में वृद्धि का मुख्य कारण धान, गेहूं, मक्का और मोटे अनाज (श्री अन्न) की पैदावार में हुई भारी बढ़ोतरी है।

आर्थिक सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 और 2023-24 के बीच पशुपालन क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति हुई है। इसमें सकल मूल्य वर्धित लगभग 195 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। इसी तरह, मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वर्ष 2014 से 2024 के बीच मछली उत्पादन में 140 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि वर्ष 2004-14 के दशक की तुलना में काफी अधिक है।

इस क्षेत्र का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू बागवानी का उभरना है। कृषि में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में लगभग 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाला बागवानी क्षेत्र अब कृषि विकास का प्रमुख इंजन बन गया है। वर्ष 2024-25 में बागवानी उत्पादन 36 करोड़ 20 लाख टन तक पहुंच गया है, जिसने 35 करोड़ 77 लाख टन के अनुमानित पैदावार को भी पार कर लिया है।

कृषि विपणन और बुनियादी ढांचे की दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार आईएसएएम के तहत 'कृषि विपणन अवसंरचना' (एएमआई ) उप-योजना और 'कृषि अवसंरचना कोष' को लागू कर रही है। इनका उद्देश्य फार्म-गेट सुविधाओं को मजबूत करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। मूल्य निर्धारण को बेहतर बनाने के लिए चल रही ई-नाम योजना का विस्तार किया गया है। गत वर्ष 31 दिसंबर तक इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी और 4,698 एफपीओ जुड़ चुके थे। इस योजना में 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियों को शामिल किया जा चुका है।

किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और पीएम-किसान योजना से आय सहायता प्रदान कर रही है। पीएम-किसान योजना की शुरुआत से अब तक पात्र किसानों को 21 किश्तों में 4.09 लाख करोड़ से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा के तहत पीएम किसान मानदेय योजना के माध्यम से पेंशन सहायता दी जा रही है। गत दिसंबर तक इस योजना में 24.92 लाख किसान नामांकित हो चुके हैं।

आर्थिक समीक्षा में इस तथ्य को भी दर्ज किया गया है कि पिछले पांच वर्षों में कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में औसत वार्षिक विकास दर स्थिर मूल्य पर 4.4 प्रतिशत रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 प्रतिशत रही। दशकीय वृद्धि दर (वित्तीय वर्ष 2016-वित्तीय वर्ष 2025) 4.45 प्रतिशत रही है। यह पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है। यह वृद्धि दर मुख्य रूप से मवेशी (7.1 प्रतिशत) और मछली पकड़ने एवं उसके पालन (8.8 प्रतिशत) के मामले में शानदार प्रदर्शन के कारण हुई है। इसके बाद फसल क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई।

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