कुशीनगर , दिसम्बर 03 -- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में बुखार से पांच बच्चों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। तीन बच्चों की मौत ढोलहा ग्राम सभा के गुलहरिया में व दो मौत पिपरा खुर्द ग्राम सभा में हुई है। जिसमें गुलहरिया टोला में एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित पिंटू गोंड की सात वर्षीय पुत्री खुशी की बुधवार को जिला अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। एक दिन बाद बुखार व झटका के चलते ही उनकी तीन वर्षीय छोटी बेटी मंजू की भी बीआरडी मेडिकल कालेज अस्पताल में मृत्यु हो गई। गुरुवार को बुखार से ही पीड़ित उनके भाई दशरथ के पांच वर्षीय पुत्र कृष की मृत्यु घर पर हो गई।

पिपरा खुर्द गांव के गुलहरिया टोला निवासी राजकुमार के सात वर्षीय बेटे सागर को बृहस्पतिवार को बुखार हुआ। परिजन निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए। राहत नहीं मिलने पर रामकोला सीएचसी पर शुक्रवार को लेकर गए। इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज कुशीनगर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। यहां से डॉक्टरों ने हालत नाजुक बताते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर शनिवार को रेफर कर दिया।

इलाज के दौरान आराम नहीं होने पर परिजन गोरखपुर एम्स लेकर चले गए, जहां इलाज के दौरान रविवार की रात को मौत हो गई। इनके पड़ोसी रामानंद के तीन वर्षीय बेटे अंश को बुखार होने पर शनिवार को रामकोला सीएचसी पर परिजन लेकर गए जहां से इलाज के बाद मेडिकल कॉलेज कुशीनगर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया। उसी दिन शाम को बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर डॉक्टरों ने रेफर कर दिया।सोमवार को सुबह इलाज के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई।

प्रभावित ग्राम सभाओं में सफाई अभियान तेज़ी से चलाया जा रहा है। ज़मीनी स्थिति यह है कि पूरा विकास खंड सफाईकर्मियों के संकट से जूझ रहा है। 200 से अधिक टोले, सफाईकर्मियों की संख्या 89 विकास खंड में कुल 77 ग्राम सभाएं हैं। इनमें 115 राजस्व गांव और 200 से अधिक टोले हैं, जबकि सफाईकर्मियों की तैनाती मात्र 89 है। इनमें से एक सफाईकर्मी निलंबित भी है, जिसके चलते चार ग्राम सभाएं पूरी तरह बिना सफाईकर्मी के रह गई हैं।इतनी कम संख्या होने के कारण रोस्टर लागू होने के बाद भी नियमित सफाई नहीं हो पा रही है और गांव कई दिनों तक गंदगी, कीचड़ और कचरे के ढेर से घिरे रहते हैं।

तीन ग्राम पंचायतें बिना सफाईकर्मी के स्थिति यह है कि विकासखंड की तीन ग्राम पंचायतों में एक भी सफाईकर्मी तैनात नहीं है। प्रशासन सफाई अभियान का निर्देश तो दे रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी से इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करना मुश्किल है।

ग्राम प्रधानों की लापरवाही ने बढ़ाई समस्या कई ग्राम प्रधान अपने-अपने ग्राम सभाओं में नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करते, जिस कारण गांवों में लगातार जल-भराव की समस्या बनी रहती है। ठहरा हुआ पानी मच्छरों को तेजी से पनपने का अवसर देता है, जिससे डेंगू, मलेरिया, कालाजार और अन्य जलजनित बीमारियां बढ़ने का खतरा कई गुना हो जाता है।

लोग भी केवल सफाईकर्मियों के भरोसे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का कहना है कि सफाईकर्मियों की कमी अपनी जगह है, लेकिन गांव के लोग भी सिर्फ सरकारी सफाईकर्मियों के भरोसे न बैठें। अपने घर और आसपास की साफ-सफाई खुद करें। नालियां बंद न होने दें। गंदा पानी जमा न होने दें। कचरा खुले में न फेंकें। बुखार का लक्षण दिखे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। हाल ही में हुई बच्चों की मौतें साफ संकेत देती हैं कि लापरवाही घातक साबित हो सकती है। इसलिए ग्राम प्रधान, सफाईकर्मी, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिक-सबको अपनी भूमिका निभानी ही होगी।

पिपरा खुर्द में न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, न नाली नेबुआ नौरंगिया। पिपरा खुर्द गांव में करोड़ों की लागत से बन रही पानी टंकी पिछले तीन वर्षों से अधूरी है। कई जगह पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन पानी की आपूर्ति अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने बताया कि परियोजना सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गौरी पासवान ने गांव में लगभग एक किलोमीटर नाली निर्माण की मांग डीएम और सीडीओ से की। अधिकारियों ने शीघ्र नाली निर्माण का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने बताया कि बीमारी छुआछूत की नहीं है, बल्कि जानवरों से फैलने वाला रोग है। उन्होंने ग्रामीणों को घरों के आसपास स्वच्छता रखने और मवेशियों को दूर रखने की अपील की गई है।

जिलाधिकारी ने पिपरा खुर्द के ग्राम गुलहरिया मामले को लेकर अधिकारियों के साथ कि आवश्यक बैठक की। बैठक दौरान नेबुआ नौरंगिया विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा पिपरा खुर्द के टोला गुलहरिया में बुखार से पीड़ित दो मासूम बच्चों की मृत्यु होने पर कार्ययोजना के तहत बीमारी की रोकथाम पर गहन विचार विमर्श करते हुए सम्बन्धित विभागों की जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रभावी कार्यवाही अमल में लाये जाने का निर्देश दिए गये।जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि सीएससी पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, उक्त ग्रामवासियों सहित अगल बगल के ग्रामों में स्क्रीनिंग किये जाने सहित चिकिसकों की टीम को मुस्तैदी से निगरानी किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि उक्त गांव में जो भी व्यक्ति बीमार हैं या किसी होस्पिटल में भर्ती हैं उन्हें भी ट्रेस किया जाय। उन्होंने कहा कि जो 18 वच्चे चिन्हित किये गए हैं उन्हें समय समय पर दवाओं का सेवन कराने एवं प्रत्येक दिन प्रातः काल एवं सायंकाल की रिपोर्ट लेते हुए सीडीओ को उपलब्ध कराएं एवं स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए चिकित्सकों को कुशल मार्गदर्शन करें।

जिलाधिकारि ने उक्त बीमारी के सम्बंध में बताया कि ये जानवरों में पाई जाती है तथा किसी मनुष्य से एक दूसरे में नही जाती है। उन्होंने पशुओं को आबादी से बाहर रखने एवं ग्राम वासियों के बीच जन जागरूकता हेतु बैनर/पोस्टर आदि के माध्यम से जागरूक किये जाने हेतु सम्बन्धित को निर्देशित किया। इसी प्रकार गांव में जिला पंचायत राज अधिकारि को ग्राम प्रधानों के माध्यम से जन जागरूकता सहित एंटी लार्वा का छिड़काव कराने, एवं साफ सफाई की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने का निर्देश दिए गए।

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