लखनऊ , जनवरी 09 -- लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लव जिहाद मामले को लेकर शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को कुलपति से मिलने के लिए कथित तौर पर लगभग 10 मिनट तक खड़ा रखा गया। आरोप है कि इसके बाद भी कुलपति से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे नाराज उनके समर्थकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर नारेबाजी की।
इसके बाद अपर्णा यादव ने प्रशासनिक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में घटित संवेदनशील घटनाओं की जानकारी समय रहते मुख्यमंत्री और राज्यपाल को नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला महिला उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा था, तो इसे दबाने की कोशिश क्यों की गई।
अपर्णा यादव ने पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू और वाहिद अली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले को लगभग 10 दिनों तक दबाकर क्यों रखा गया। साथ ही पूछा कि पीड़िता को महिला आयोग के पास जाने से क्यों रोका गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "क्या महिला आयोग को जांच के लिए किसी की अनुमति लेनी पड़ेगी।"इससे पूर्व सुबह कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद की तरफ से की गई प्रेस कांफ्रेंस में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को दोषी बताया गया है। जांच में उसके खिलाफ फिजिकल, इमोशनल और मेंटल हरासमेंट के आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है और निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलपति सोनिया नित्यानंद ने बताया कि आरोपी डॉक्टर फिलहाल निलंबित है। विशाखा कमेटी की फाइंडिंग के आधार पर उसे निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है। चूंकि एमबीबीएस में प्रवेश नीट के जरिए और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत होता है, इसलिए निष्कासन की संस्तुति विभाग को भेजी गई है।
गौरतलब है कि पीड़िता केजीएमयू से एमडी पैथोलॉजी कर रही है, जबकि आरोपी डॉक्टर पैथोलॉजी विभाग में सेकंड ईयर का जूनियर रेजिडेंट और उसका सीनियर बताया जा रहा है। 17 दिसंबर को पीड़िता ने कथित तौर पर मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दवा की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे केजीएमयू के आईसीयू में भर्ती कराया गया। परिजनों के पहुंचने पर पूरा मामला सामने आया और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल व राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित