नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- देश भर में 19 राज्यों में किसान रजिस्ट्री ( पंजीकरण) का काम चल रहा है और अब तक 8.47 करोड़ किसान पहचान पत्र जारी किये जा चुके हैं। यह जानकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज चौहान ने शुक्रवार को राज्य सभा में प्रश्नकाल के दौरान अनुपुरक प्रश्नों के उत्तर में दी।

उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी आधारित सहूलियत और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष डिजिटल सार्वजनिक-अवसंरचना स्थापित करने की घोषणा की है। किसानों की रजिस्ट्री और किसान पहचान-पत्र से किसानों की अलग पहचान बनेगी। पहचान पत्र में उनकी, उनके पास कृषि जोत, परिवार के सदस्यों और पशुधन संबंधी पूरा डाटा होगा। इससे उन्हें संस्थाओं से कर्ज लेने में आसानी होगी।

श्री चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु , केरल, पश्चिम बंगाल समेत 19 राज्यों में किसान रजिस्ट्री तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। अब तक 8.47 करोड़ किसानों के आई-कार्ड बनाये जा चुके हैं।

गोवा, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर में किसान रजिस्ट्री पर काम जल्द शुरू होने वाला है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों और झारखंड में कृषि भूमि के अभिलेख का डिजिटलीकरण न होने से अभी वहां यह काम नहीं शुरू हुआ है।केंद्र सरकार इसके लिए उनके प्रस्ताव पर सहायता देने को तैयार है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रयोग से किसानों को सूचनाओं के माध्यम की मदद के लिए किसान मित्र चैटबोट टूल शुरू किया है जिस पर किसान हिंदी, अंग्रेजी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में संवाद कर खेती-बाड़ी से संबंधित जानकारी ले सकते हैं।

इस चैटबोट के माध्यम से औसतन हर रोज 8000 जानकारियां मांगी जा रही है और अब तक किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर कुल 93 लाख प्रश्न पूछे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली के तहत ऐसी डिजिटल सुविधा प्रदान की जा रही है जिसमें किसान अपनी फसल की पत्ती की फोटो भेज कर कीट संक्रमण और उसके उपचार की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार 'भारत विस्तार' प्लेटफार्म पर सभी डिजिटल सुविधाओं को एकीकृत करने जा रही है।

प्रौद्योगिकी और डाटा के महत्व का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि 'डिजिटल कृषि मिशन' के माध्यम से युवाओं को कृषि क्षेत्र में नवाचार और नये समाधान की खोज तथा नये स्टार्टअप खड़े करने के लिए कृषि स्टैक (डिजिटल डाटा संग्रह सुविधा) से डाटा मुहैया कराने के प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कृषि स्टार्टअप इकाइयों को भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मैपिंग का डाटा भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

पीएम फसल बीमा योजना में जल्दी पकने वाली फसलों के नुकसान के दावों के जल्द निपटने की व्यवस्था संबंधी एक प्रश्न पर श्री चौहान ने कहा कि राज्यों को इस योजना के अंतर्गत एक माह के अंदर फसल की क्षति के आकलन की रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के 21 दिन के अंदर भुगतान न करने पर बीमा कंपनी किसानों को 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का भी भुगतान करेंगी। राज्यों की और से देरी होने पर उन्हें भी किसान को 12 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।

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