जयपुर , जनवरी 24 -- राजस्थान के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने राज्य को विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाला प्रदेश बताया है और कहाहै कि यहां जंगली और कृषि दोनों प्रकार की वनस्पतियों की व्यापक श्रृंखला उपलब्ध है तथा मकरंद एवं पराग की प्रचुरता मधुमक्खी पालन के लिए प्रदेश को अनुकूल बनाने से मधुमक्खी पालन अब किसानों के लिए आय का सशक्त स्रोत बन चुका है और किसान खेती के साथ शहद उत्पादन कर आय में वृद्धि कर रहे हैं।

डॉ. मीणा शनिवार को कृषि प्रबंध संस्थान, दुर्गापुर (जयपुर) में आयोजित "हाई वैल्यू मधुमक्खी उत्पादन: तकनीकी, वर्तमान परिदृश्य, भविष्य एवं संभावनायें" विषयक दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि देश के कुल शहद उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी नौ प्रतिशत है और प्रदेश देश के पांच अग्रणी शहद उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्तमान में प्रदेश में तीन हजार 350 मधुमक्खी पालकों के पास दो लाख 76 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनसे लगभग आठ हजार 500 टन शहद का उत्पादन हो रहा है। शहद उत्पादन में अलवर, भरतपुर और हनुमानगढ़ अग्रणी जिले हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां एवं 50 हजार मधुमक्खी बॉक्स वितरित किये जा रहे हैं, जिन पर 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में कुल आठ करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है।

पराग की अनुपलब्धता एवं अधिक तापमान की स्थिति में मधुमक्खी कॉलोनियों के स्थानान्तरण के लिए राज्य के एक हजार मधुमक्खी पालकों को नौ हजार रुपये प्रति पालक की दर से सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से शहद उत्पादन के प्रशिक्षण भी दिये जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा दो करोड़ रुपये की लागत से एक हजार मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी पालन किट वितरित की जा रही है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भरतपुर और टोंक जिलों में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से मधुमक्खी पालन के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्ता युक्त कॉलोनियां, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन एवं शहद की गुणवत्ता जांच जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

डाॅ मीणा ने कहा कि राज्य सरकार मधुमक्खी पालकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। शहद उत्पादन में आ रही समस्याओं और मधुमक्खी पालकों की मांगों को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को शहद के प्रचार-प्रसार तथा आमजन को इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिये।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से किसान तेजी से प्रगतिशील बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि आईसीएआर के अनुसार मधुमक्खी पालन से संबंधित क्षेत्रों में फसलों की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि होती है।

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