श्रीगंगानगर, 15 दिसम्बर (वार्ता) राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी तहसील क्षेत्र में स्थित गांव राठीखेड़ा के नजदीक एक निजी कंपनी द्वारा स्थापित किए जा रहे एशिया के सबसे बड़े एथेनॉल संयंत्र को लेकर किसानों और स्थानीय ग्रामीणों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संयंत्र की क्षमता 40 मेगावाट बताई जा रही है और इसकी अनुमानित लागत करीब 450 करोड़ रुपये है। पिछले हफ्ते हुई व्यापक हिंसा के बाद राज्य सरकार ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की सहमति जताई थी लेकिन संघर्ष समिति और विभिन्न किसान संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। किसानों का कहना है कि यह संयंत्र पर्यावरण, जन स्वास्थ्य और भूमिगत जल स्रोतों के लिए घातक साबित होगा।
पिछले सप्ताह राठी खेड़ा क्षेत्र में प्लांट निर्माण को लेकर किसानों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद शनिवार की देर शाम हनुमानगढ़ में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और 11 सदस्यीय संघर्ष समिति के बीच समझौता वार्ता हुई। वार्ता में सरकार ने आश्वासन दिया कि जब तक स्थानीय लोगों की आशंकाओं-जैसे पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य जोखिम और जल दोहन-का समुचित समाधान नहीं किया जाता और परियोजना की समीक्षा नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई लेकिन बाद में स्पष्ट कर दिया कि वे सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे ताकि संयंत्र यहां स्थापित ही न हो सके।
किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि देश के अन्य हिस्सों में ऐसे एथेनॉल संयंत्रों के आसपास के इलाकों से लगातार प्रतिकूल रिपोर्ट्स आ रही हैं जो पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याओं और अत्यधिक भूमिगत जल दोहन की ओर इशारा करती हैं। राठीखेड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि वे इस संयंत्र को यहां नहीं लगने देंगे। यह हमारी जमीन, पानी और स्वास्थ्य को बर्बाद कर देगा। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार अपने वायदों से मुकरती है तो आंदोलन और तेज होगा।
इसी क्रम में किसान संगठनों और संघर्ष समिति ने 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ में एक बड़ी महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है। इस महापंचायत में प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत के अलावा सीकर सांसद कॉमरेड अमराराम, पंजाबी लोक गायक कंवर ग्रेवाल सहित राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कई किसान नेता शामिल होंगे।
महापंचायत की तैयारी के लिए हनुमानगढ़ जिले के साथ-साथ पड़ोसी श्रीगंगानगर जिले में भी गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। नुक्कड़ सभाएं और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। आज श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर क्षेत्र में गांव बुधरवाली, तख्त हजारा, दूदाखीचड़ और चक सोहने वाला आदि गांवों में माकपा नेता पालाराम नायक, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष कौरसिंह सिधू, खेत मजदूर यूनियन के तहसील अध्यक्ष हंसराज और पूर्व तहसील अध्यक्ष गुरपाल राम ने जनसंपर्क किया।
इस आंदोलन को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा वामपंथी दलों का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि यह एक बड़ा विरोधाभास है कि वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ही इस निजी कंपनी के साथ करार पर हस्ताक्षर करके संयंत्र को हरी झंडी दी थी। अब कांग्रेस खुद इसके विरोध में खड़ी है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। वामपंथी नेता पालाराम नायक ने कहा कि यह आंदोलन किसानों के हितों की रक्षा के लिए है। हम पर्यावरण और जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं।
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