वाराणसी , दिसंबर 03 -- काशी तमिल संगमम (केटीएस)-4.0 के दूसरे दिन बुधवार को तमिलनाडु से आए छात्रों का दल हनुमान घाट पहुंचा। सभी ने गंगा में स्नान कर मां गंगा की पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान मौजूद आचार्यों ने गंगा के विभिन्न घाटों के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

गंगा स्नान के बाद सभी मेहमानों ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया तथा मंदिरों की दिव्यता, भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद तमिल मेहमान हनुमान घाट स्थित महाकवि सुब्रह्मण्य भारती के निवास स्थान पहुंचे। वहां उन्होंने भारती जी के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। छात्रों में भारती जी के जीवन को जानने की गहरी जिज्ञासा दिखी। उन्होंने भारती निवास के निकट स्थित पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और वहां उपलब्ध सामग्री से काफी कुछ जाना।

सुब्रह्मण्य भारती के घर के बाद छात्र दल कांची कामकोटि पीठ (कांची मठ) पहुंचा और वहां के गौरवशाली इतिहास से अवगत हुआ। काशी में दक्षिण भारतीय शैली के मंदिरों को देखकर युवा दल काफी उत्साहित नजर आया।

पंडित वेंकट रमण घनपाठी ने कहा कि काशी और तमिलनाडु का रिश्ता सदियों पुराना है और यह संगमम केवल एक पखवाड़े का आयोजन नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि हनुमान घाट, केदार घाट और हरिश्चंद्र घाट पर मानो एक मिनी तमिलनाडु बसा हुआ है। यहां दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के हजारों परिवार पीढ़ियों से रहते आए हैं, जो दोनों क्षेत्रों के मधुर संबंधों का जीवंत प्रमाण हैं। केवल हनुमान घाट पर ही 150 से अधिक घर तमिल परिवारों के हैं, जिनकी गलियों में हर रोज़ स्वतः काशी तमिल संगमम होता रहता है।

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