चेन्नई , नवंबर 07 -- काशी तमिल संगमम का चौथा आयोजन दो दिसंबर से तमिलनाडु के रामेश्वरम में होगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पहल 'काशी तमिल संगमम (केटीएस 4.0)' के इस आयोजन में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आईआईटी-मद्रास) अपना सहयोग दे रहा है।
एक महीने तक चलने वाले इस सांस्कृतिक और बौद्धिक संगम में तमिलनाडु और काशी (वाराणसी) के बीच साझा विरासत का जश्न मनाने के लिए 1,500 से अधिक प्रतिनिधि एक साथ आएंगे। उल्लेखनीय है कि इस आयोजन के लिए भाग लेने के इच्छुक लोग शुक्रवार से पंजीकरण कर सकते हैं।
इस वर्ष के प्रमुख आकर्षणों में 'तमिल कार्पोम' पहल का शुभारंभ है, जो उत्तर भारत के छात्रों को तमिलनाडु में तमिल सीखने का अवसर प्रदान करेगा।
काशी तमिल संगमम 4.0 का उद्देश्य भारत की साझी विरासत और सांस्कृतिक एकता को आगे बढाना है और साथ ही भाषाई और बौद्धिक संबंधों को पुनर्जीवित एवं सुदृढ़ करना है। पिछले आयोजनों की तरह ही आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) संस्कृति, रेलवे, वस्त्र और पर्यटन सहित कई केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से काशी तमिल संगमम 4.0 के कार्यान्वयन के लिए नोडल संस्थान के रूप में कार्य करेंगे।
इस आयोजन में पंजीकरण के लिए जनता का स्वागत करते हुए, आईआईटी मद्रास के निदेशक, प्रो. वी. कामकोटि ने कहा, "इस वर्ष के आयोजन का विषय 'कार्पोम तमिल (आइए तमिल सीखें)' है। इस पहल का उद्देश्य देश भर में तमिल भाषा की समृद्धि के बारे में जागरूकता फैलाना है।"इसके अलावा, भारतीय सिद्ध चिकित्सा पद्धति के लाभों के बारे में भी जागरूकता पैदा की जाएगी। शास्त्रीय ग्रंथों और प्राचीन स्थलों की झाकियों को गाडियो में लगाए गए डिजिटल बोर्डों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
आईआईटी मद्रास इस आयोजन के लिए प्रतिनिधियों के पंजीकरण और चयन प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा और रेल मंत्रालय के सहयोग से यात्रा, आवास, भोजन और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों के दौरे सहित संपूर्ण योजना और रसद का प्रबंधन करेगा।
तमिलनाडु से लगभग 1500 प्रतिनिधि छात्र, शिक्षक, लेखक और मीडिया, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के व्यक्ति, पेशेवर एवं कारीगर, महिलाएं और आध्यात्मिक (शास्त्रीय गायक, आध्यात्मिक शिक्षक, मंदिर पुजारी और श्रमिक) सात विविध श्रेणियों में भाग लेंगे। वहींउत्तर प्रदेश लगभग 300 छात्र इसमें भाग लेंगे।
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