खरगोन , जनवरी 02 -- मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में काले जादू, तंत्र-मंत्र और कथित 'धनवर्षा' के नाम पर किए गए अपहरण के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए छह वर्षीय बालक को 22 दिन बाद सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने शुक्रवार शाम पत्रकारों को बताया कि बालक का अपहरण 10 दिसंबर को सनावद थाना क्षेत्र अंतर्गत नवोदय विद्यालय रोड स्थित खंगवाड़ा फाटा के पास उसके घर के बाहर से किया गया था। आरोपियों ने क्रिकेट बैट और बॉल दिलाने का लालच देकर बच्चे को मोटरसाइकिल पर बैठाया और फरार हो गए थे।
घटना के बाद सनावद थाने में प्रकरण दर्ज कर सनावद, बड़वाह, बेड़िया, मंडलेश्वर और बलकवाड़ा थानों की संयुक्त पुलिस टीमें गठित की गईं। बालक की तलाश के लिए 22 दिनों तक चले विशेष अभियान में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया गया।
जांच के दौरान साइबर सेल, एफएसएल, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, डॉग स्क्वॉड और कंट्रोल रूम का सहयोग लिया गया। पुलिस ने 1000 से अधिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले, 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जंगल और बैकवॉटर क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया तथा करीब 150 लोगों से पूछताछ की।
एसपी वर्मा ने बताया कि 31 दिसंबर को पीड़ित बालक के घर के पास काले जादू में उपयोग की गई उसकी निर्वस्त्र तस्वीर, एक डायरी तथा नींबू और मालाओं जैसी तांत्रिक सामग्री बरामद हुई थी। इससे तंत्र-मंत्र की आशंका गहराई, हालांकि तस्वीर के नीचे लिखे नाम और मोबाइल नंबर भ्रामक पाए गए।
जांच के दौरान पुलिस को एक कथित बाबा की सूचना मिली, जिसकी पहचान सुरेंद्र उर्फ पिंटू उर्फ अंकित के रूप में हुई। आरोपी पिछले 20 दिनों से किराए के मकान में रह रहा था और केवल रात में वहां आता था। निगरानी के दौरान पुलिस ने देर रात उसे बच्चे के साथ देखा। आरोपी बच्चे को छोड़कर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन मौके पर ही पकड़ लिया गया। इसके बाद उसके तीन अन्य साथी शुभम उर्फ लव यादव, रामपाल नरवरे और धन सिंह बड़ोले को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी तांत्रिक क्रियाओं के माध्यम से धनवर्षा कराने और जमीन में दबा सोना खोजने का दावा करता था। बालक को 22 दिनों तक पुनासा क्षेत्र में एक किराए के कमरे में रखा गया, जहां उसके साथ अमानवीय और अपमानजनक तांत्रिक क्रियाएं की गईं।
पुलिस के अनुसार बालक की मां करीब पांच वर्ष पूर्व परिवार छोड़ चुकी है। बालक अपनी दो बहनों के साथ दादा-दादी के पास रहता था, जबकि उसका पिता रोजगार के सिलसिले में गोवा में कार्यरत है।
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