पटना , फरवरी 06 -- बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कालुघाट इंटर मल्टी मॉडल टर्मिनल (आईएमएमटी) बिहार को जल परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान देगा और जल मार्ग विकास परियोजना के लक्ष्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
परिवहन मंत्री श्री कुमार ने गुरूवार को सारण जिले में आईएमएमटी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टर्मिनल को जल्द से जल्द चालू करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल बिहार को जल परिवहन के क्षेत्र में नई पहचान देगा और जल मार्ग विकास परियोजना के लक्ष्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मंत्री ने निर्देश दिया कि यहां ड्रेजिंग और अन्य तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए जिससे टर्मिनल सुचारू रूप से संचालित हो सके। उन्होंने विभागीय पदाधिकारियों और इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) के अधिकारीयों को हर 15 दिन पर काम की समीक्षा करते हुए कार्गों सेवा मार्च तक सुनिश्चित करने कहा।
मंत्री श्री कुमार ने कहा कि निर्माणाधीन सामुदायिक जेटी का भी काम शीघ्रता से किया जाए और डोरीगंज से कालुघाट तक व्यापारिक दृष्टिकोण से संभावित घाटों का चयन कर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि इस टर्मिनल का मुख्य उद्देश्य बिहार और पश्चिम बंगाल से कार्गो को नेपाल तक पहुंचाना है। इससे व्यापार बढ़ेगा, सड़क परिवहन पर बढ़ता दबाव कम होगा और माल ढुलाई काफी सस्ती, तेज एवं पर्यावरण-अनुकूल हो सकेगी। जल मार्ग से माल की ढुलाई सड़क या रेल की तुलना में बहुत कम खर्चीली होती है।
परिवहन मंत्री ने बताया कि 17 स्थानों पर नए सामुदायिक जेटी का निर्माण हो रहा है। वर्तमान में 21 जेटी मौजूद हैं, जिन्हें जल्द ही राजस्व विभाग से हस्तांतरित कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिमरिया घाट, अयोध्या घाट, चित्रोर घाट, एनआईटी घाट, कोनहारा घाट, हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर), कहलगांव, खवासपुर, कंगन, पत्थर घाट, ग्यासपुर पीपापुल, चाकोसन पीपापुल और अन्य जगहों पर जेटी निर्माण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कालुघाट आईएमएमटी गंगा नदी (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) के किनारे बसा एक महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनल है, जिसकी कुल लागत 82.48 करोड़ रुपये रही है। इसके चालू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, नए रोजगार सृजित होंगे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। यह टर्मिनल 13.17 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। इसमें एक बर्थ है जिसकी वार्षिक कंटेनर हैंडलिंग क्षमता 77 हजार है। तट पर कंटेनरों के लिए 2,895 वर्ग मीटर का भंडारण यार्ड बनाया गया है। इसके अलावा टर्मिनल प्रशासन भवन, विद्युत उपकेंद्र भवन, वेट ब्रिज नियंत्रण कक्ष, सुरक्षा कक्ष और पंप हाउस जैसी जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
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